"ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव की चर्चा, सूरत सेमिनार में जुटे विशेषज्ञ"

सूरत: सूरत में ग्रीन एनर्जी रिच ग्रिड को लेकर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें नेट-ज़ीरो लक्ष्य और ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) पर व्यापक चर्चा हुई।

सेमिनार में बदलते समय के साथ बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर, विंड आदि) के विभिन्न आयामों और उसके प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की गई। भारत द्वारा वर्ष 2070 तक और गुजरात द्वारा वर्ष 2047 तक ‘नेट-ज़ीरो’ उत्सर्जन हासिल करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा क्षेत्र की रणनीतियों और योजनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। साथ ही ऊर्जा स्वतंत्रता और सतत विकास के मिशन के तहत बड़े पैमाने पर ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर भी प्रकाश डाला गया।

विशेषज्ञों ने बढ़ती बिजली मांग, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पावर सिस्टम प्लानिंग में किए जा रहे नवाचारों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में तकनीकी और प्रबंधन संबंधी कई चुनौतियां हैं, जिन्हें सही योजना और आधुनिक तकनीक के माध्यम से दूर किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि ‘ग्रीन ट्रांजिशन’ केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए ही नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि तकनीक और सटीक योजना के समन्वय से ही स्वच्छ, विश्वसनीय और आधुनिक ऊर्जा प्रणाली विकसित की जा सकती है। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान से यह सेमिनार वर्ष 2047 तक देश को मजबूत ऊर्जा ढांचा प्रदान करने में अहम भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम में सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ( सीईए) के वरिष्ठ सलाहकार एस.के. सोनी, ग्रिड इंडिया एनएलडीसी के निदेशक राजीव पोरवाल, आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर डॉ. जाकिर हुसैन, सीटीयूआईएल के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर कैलाश गुप्ता तथा एनसीईएफआई के मुख्य सलाहकार पी.सी. गर्ग सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।