भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश में एक निशान, एक विधान और एक कानून की अवधारणा राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाली है और इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है और जल्द ही मध्य प्रदेश भी इसे लागू करने वाले राज्यों में शामिल होगा।
मुख्यमंत्री बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया@2047 कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि यूसीसी के लिए उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो विभिन्न जिलों में सभी वर्गों से सुझाव ले रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समुदाय को यूसीसी से अलग रखा जाएगा और उन्हें अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों के पालन की स्वतंत्रता होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियां बना रही है।
डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विकास के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है और वे स्वयं भी अब ईवी का उपयोग कर रहे हैं, जिससे प्रदूषण और ईंधन खपत में कमी आएगी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के परिणामस्वरूप लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS-2025) में 30 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए, जिनमें से करीब 30 प्रतिशत निवेश धरातल पर दिखाई दे रहा है। इससे 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ा विस्तार हुआ है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 5 से बढ़कर 30 हो गई है, जिनमें से 7 कॉलेज पिछले दो वर्षों में शुरू किए गए हैं। साथ ही 55 जिलों में पीएम एक्सीलेंस कॉलेज और नए विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए 18 नई नीतियां लागू की हैं और प्रति श्रमिक रोजगार पर 5,000 रुपये मासिक सहायता देने की योजना भी शुरू की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन विकास को भी बढ़ावा दे रही है। धार स्थित भोजशाला परिसर के विकास और धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘लाड़ली बहना योजना’ के तहत अब तक 36 किस्तों में 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान कर चुकी है।