भारत-म्यांमार वार्ता में अहम सहमति, सुरक्षा सहयोग बढ़ाने और संप्रभुता के सम्मान पर जोर

नई दिल्ली: भारत और म्यांमार के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए दोनों देशों ने सुरक्षा, व्यापार और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। म्यांमार ने भारत को भरोसा दिलाया कि उसकी भूमि का इस्तेमाल भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा, जबकि भारत ने भी म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के बीच हैदराबाद हाउस में हुई बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा, सीमा प्रबंधन, विकास सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि म्यांमार भारत का अहम पड़ोसी है और दोनों देशों के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है। बैठक में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

दोनों देशों ने कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने पर भी सहमति जताई। कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट प्रोजेक्ट और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग को जल्द पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा दुर्लभ खनिजों और महत्वपूर्ण संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में साइबर धोखाधड़ी के मुद्दे पर भी बातचीत हुई। भारत ने बताया कि अब तक 2,400 से अधिक भारतीयों को म्यांमार से वापस लाया जा चुका है, जबकि कुछ नागरिक अब भी वहां फंसे हुए हैं। दोनों देशों ने इस समस्या के समाधान के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार में शांति, स्थिरता और समावेशी विकास का समर्थन करते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में अशांति और उसके प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। वहीं, म्यांमार के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को अपने देश के दौरे का निमंत्रण भी दिया।

यह बैठक भारत-म्यांमार संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।