नई दिल्ली: राजधानी के रोहिणी स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में अव्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई है और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।
निरीक्षण के दौरान कार्यालय में व्यवस्था, नागरिक सुविधाओं और कार्यप्रणाली में कई खामियां सामने आने पर मुख्यमंत्री ने तत्काल सुधार के आदेश दिए।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि दफ्तर में आने वाले नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी व समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने भवन की जर्जर हालत, खराब लाइट व्यवस्था, बंद एयर कंडीशनर, टूटे फर्श, गंदे शौचालय, बैठने की कमी और रखरखाव में लापरवाही पर नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जहां रोज बड़ी संख्या में लोग अपने जरूरी दस्तावेजों और संपत्ति से जुड़े काम कराने आते हैं, वहां ऐसी अव्यवस्था किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती।
मुख्यमंत्री ने कार्यालय में उपस्थित नागरिकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं भी सुनीं। कई नागरिकों ने लंबे समय तक खड़े रहकर इंतजार करने, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने, टोकन सिस्टम की कमी, खराब एयर कंडीशनिंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने मौके पर ही सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए और सरकारी कार्यालयों में सम्मानजनक एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों से कार्यालय भवन की स्थिति उपेक्षित बनी हुई है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि अगर लाइटें खराब हैं, शौचालय उपयोग योग्य नहीं हैं, फर्श टूटा हुआ है और नागरिकों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं है तो यह प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में की गई पत्राचार और मरम्मत प्रस्तावों का पूरा रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने भवन में कबाड़, अनुपयोगी सामान और अव्यवस्थित रिकॉर्ड व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिया कि भवन की नियमित देखरेख और रखरखाव के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए और प्रत्येक कार्यालय में उत्तरदायी अधिकारी या केयरटेकर नामित किया जाए, जो बुनियादी सुविधाओं, साफ-सफाई और रखरखाव की नियमित निगरानी सुनिश्चित करे।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि एक सप्ताह के भीतर भवन में आवश्यक फेस लिफ्टिंग का कार्य पूरा किया जाए। इसमें सभी खराब लाइटों को बदलना, एयर कंडीशनरों की मरम्मत, टूटे हुए फर्श और टाइलों को दुरुस्त करना, साफ-सफाई सुनिश्चित करना, नागरिकों के लिए पर्याप्त बेंच और बैठने की व्यवस्था उपलब्ध कराना तथा प्रतीक्षारत लोगों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करना शामिल होगा। उन्होंने कहा कि जब तक नए और आधुनिक कार्यालय भवन की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक वर्तमान परिसर में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर नागरिकों को अधिकतम सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि किसी कार्य के लिए आए बुजुर्ग नागरिकों, महिलाओं या अन्य लोगों को घंटों खड़े रहना पड़े। छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी संवेदनशीलता और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।
मुख्यमंत्री ने रिकॉर्ड रूम और दस्तावेजों की सुरक्षा व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों की सुरक्षा, डिजिटलीकरण और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या तकनीकी समस्या की स्थिति में सरकारी रिकॉर्ड सुरक्षित रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अनावश्यक देरी के प्रति भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि नागरिकों के कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं और किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। अगर किसी प्रकार की रिश्वतखोरी, उत्पीड़न या कार्य में जानबूझकर देरी की शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सुधारात्मक कदम तुरंत लागू किए जाएंगे।