शायरों ने काव्य रचनाओं से श्रोताओं को समां बांधा

पानीपत (निर्मल सिंह विर्क) : मन की उड़ान साहित्यिक संस्था द्वारा अपना तेईसवां साहित्यिक कार्यक्रम होटल थ्रोसं अल्फा सिटी करनाल में आयोजित किया। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर इकबाल पानीपती ने की, मुख्य अतिथि समाजसेवी संदीप नैन रहे, विशिष्ट अतिथि कुरूक्षेत्र से पहुंचे वरिष्ठ शायर स. कुलवन्त सिंह रफीक,शायरा गायत्री कौशल आर्य व कवि दयाल चन्द जास्ट रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ शायर इक़बाल पानीपती ने कहा हर तरफ थी आग की लपटे धूंआ था बेशुमार,आप कहते हैं के बसती में जला कुछ भी नहीं, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ महावीर प्रसाद शास्त्री ने कहा सदा का चैन ले गई, रूंओस नैन दे गई, सुख एक रैन दे गई, विदेश की चमक दमक, मुख्य अतिथि सन्दीप नैन ने कहा साहित्य समाज में चेतना जगाने का कार्य करता है और जिससे समाज को दिशा मिलती है, वरिष्ठ शायर कुलवन्त सिंह रफीक ने कहा मनहूस हवाओं से बचाती हैं बेटियां,घर को मुहब्बतों से सजाती है बेटियां, शायरा गायत्री कौशल आर्य ने कहा आप आने लगे ख्यालों में,मैं उलझनें लगी सवालों में, कवि दयाल चन्द जास्ट ने कहा युद्ध ही अंतिम निर्णय नहीं होता, ढूंढने से समस्या के और भी हल निकलते हैं, कवयित्री पूनम गोयल ने कहा तुम आए चांद की तरह मेरी अंधेरी रात में, अभी जरा सी देर तो रहो मेरी निगाह में, कवि दलीप खरेरा ने कहा कुछ नहीं हुआ हासिल, देख लिया बनकर शातिर,काश कली बन जाऊं फिर,मासूम तितलियों की खातिर, युवा शायर रामेश्वर देव ने कहा कब मेरा बदल जाए मुकद्दर पता नहीं, ये वहम मेरे दिल का कभी टूटता न था, कवि डॉ आर बी कपूर ने कहा गुजर तुमने भी जाना है,गुजर हमने भी जाना है, कवि डॉ सुभाष सैनी ने कहा उनकी बातों में एक बात बड़ी खास होती है, कि झूठ बोलते वक्त वाणी में पूरी मिठास होती है,कवि प्रेम पाल सागर ने बेचते वो मौत का सामान हैं पगले, खुद को कहते कौम का निगाहबान है पगले,कवि नरेश लाभ ने कहा तुम मेरी जीवन मधुशाला, तुमसे है इतनी सी आशा,कवयित्री रोजलीन ने कहा कभी पतझड़ के टूटे तिनकों, सूखे पत्तों को बुहार कर, कुछ सहेजा था इन हथेलियों ने, कवयित्री अनुजा कपूर ने कहा हम कुछ भी उधार नहीं लेते, कफ़न भी लेते हैं तो जान देकर,शायरा वनीता चौपड़ा ने कहा मन की यह धरती पानी पानी हो बैठी,नैनन नैनन नवल नेह की जब पहली बरसात हुई,युवा शायर अशोक मलंग ने कहा हर बात वो बताकर कहती हैं खैर छोड़ो, जज़्बात वो जगाकर,कहती हैं खैर छोड़ो, कवि राजकुमार 'मायूस'ने कहा गमों का बोझ उठा कर हम चलते ही रहे, मंन्जिल का निशा हम को, अभी तक मिला नहीं, कवि डॉ श्याम सिंह ने कहा प्रेम को कहते सब पूरा, लेकिन वह तो अधूरा है, चलती सांसें जब थम जाती,जीवन कहते पूरा है, कवयित्री प्रीति सिंह ने कहा जख्मों की दरारों से झांकता एक रिश्ता,कभी बड़ा अनमोल था तेरे लिये भी मेरे लिये भी, डॉ सोनिया नैन ने कहा मैं चिड़िया तेरे आंगन की जाऊं कहां मैं, जाऊं कहां, कवयित्री सुमन शर्मा ने कहा कुछ ख्वाब बनते हैं अधूरे रह जाने के लिए।

कार्यक्रम में स. गुरमुख सिंह वड़ैच, राजपाल रोजडा, रमेश कुमार ने भी अपनी अपनी प्रस्तुति दी। संस्था की ओर से कार्यक्रम अध्यक्ष, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिह्न व शाल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन युवा शायर रामेश्वर देव ने किया।कार्यक्रम में विरेन्द्र कुमार,नवीन कुमार, गोपाल दास,आरती,शीला रानी,सुरेखा,देव, प्रिया सहित अन्य श्रोताओं ने हिस्सा लिया।