सरकारी टेंडरों में सप्लाई हो रहे साईकिलों की क्वालिटी टेंडरों की शर्तों अनुसार नहीं ,होनी चाहिए जाँच
लुधियाना 29 नवंबर । सिलाई मशीन की तरह विश्व की दूसरी साइकिल निर्माता इंडस्ट्री इन दिनों गंभीर चुनौतियों के दौर से गुजर रही है। उद्योग जगत में चर्चा है कि भ्रष्ट अधिकारियों के कारण साईकिल की क्वालिटी निरंतर गिरती जा रही है। यहां तक की पब्लिक मंच पर सरकारी टेंडरों में सप्लाई हो रहे उप्पादों की टेंडर शर्तों के हिसाब से गुणवक्ता जाँच हो तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। हलाकि राज्य सरकारों द्वारा टेंडरों में 4200 से लेकर 4900 तक की कीमत में उत्पादों की सोर्सिंग की जा रही है। अलग अलग सरकारी अदारों में रिश्वतखोरी इस कदर बढ़ चुकी है की टेंडरों में प्रति साईकिल 400 से 700 रु तक एडवांस में अंडर टेबल लिए जाने की चर्चाएं आम है। ऐसे में अगर कोई सरकारी बाबू के हिसाब से नहीं चलता तो उसे टेंडर नहीं मिलता और ऐसे में काम के लिए क्वालिटी में समझोता तो करना ही पड़ता है। इसी वजह कंपनियां अपने वेंडरों पर रेट कम करने का दबाव बनाती है यही कारण है हर स्तर पर प्रोडक्ट क्वालिटी में गिरावट होने से बाजार और टेंडरों में क्वालिटी उत्पाद उपलब्ध ही नहीं है। चर्चा है इन्हीं कारणों से कुछ राष्ट्रिय कपनियों ने सरकारी टेंडरों से किनारा कर लिया है। आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो वर्तमान समय में कई टॉप कंपनियों की 70 -80 प्रतिशत सेल केवल सरकारी टेंडरों पर टिकी हुई है। यही नहीं भ्र्ष्टाचार के चलते क्वालिटी निर्माण में जुटी इंडस्ट्रियों के लिए पर्तिस्पर्धा में टिके रहना बड़ी चुनौती बनी हुई है।

इस संबंध में यूसीपीएमए के पूर्व प्रधान डीएस चावला ने कहा की सरकारी सिस्टम में भ्र्ष्टाचार इस कदर बढ़ गया है की इंडस्ट्री को ना चाहते हुए भी घटिया क्वालिटी के उत्पादन में जुटे रहना पड़ रहा है। आज बदकिस्मती यह है की ग्राहक क्वालिटी प्रोडक्ट मांग रहा है लेकिन बीआईएस से लेकर अन्य विभागों तक अफसरों की रिश्वत खोरी के कारण इंडस्ट्री क्वालिटी निर्माण कर नहीं पा रही। सरकारी टेंडरों से लेकर खुदरा दुकानों पर बिक रहे साइकिलों की अगर सही ढंग से क्वालिटी जाँच की जाए तो सब कुछ सामने आ जाएगा। ऊपर से इंडस्ट्री को 18 % टैक्स पर रॉ मैटीरियल उपलब्ध करवा 5 % पर बेचने से इंडस्ट्री की सारी वर्किंग कैपिटल इनपुट क्रेडिट के रूप में विभाग के पास फंस रही है जिससे रिश्वत खोरी और बढ़ेगी।
