खुद को शहीद के वारिस बताने वाले अशोक थापर के बेटे ने जताया खुला रोष
लुधियाना 23 मार्च। शहादत दिवस 23 मार्च को शहीदे-आजम भगत सिंह और उनके साथियों राजगुरु और सुखदेव थापर देश-दुनिया में श्रद्धांजलि दी गई। पंजाब की औद्योगिक राजधानी लुधियाना के नौघरां मौहल्ले में शहीद सुखदेव के पुश्तैनी निवास पर इस दौरान हवन-यज्ञ रखा गया। शहीद सुखदेव थापर मैमोरियल ट्रस्ट के संचालक अशोक थापर ने हर साल की तरह इसका आयोजन किया।
यहां काबिलेजिक्र पहलू है कि इस दौरान सूबे की सत्ताधारी पार्टी आप समेत किसी भी दल के जनप्रतिनिधि यानि खासकर विधायक नहीं पहुंचे। बेशक, कांग्रेस के पूर्व विधायक सुरिंदर डावर व संजय तलवाड़ के साथ पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर शामसुंदर मल्होत्रा ने वहां हाजिरी लगाई। इसे लेकर ट्रस्ट संचालक के बेटे त्रिभुवन थापर ने सार्वजनिक तौर पर रोष जताया। साथ ही दावा किया कि खत्री समाज अब इस मुद्दे पर आंदोलन का रुख अपनाएगा।
‘असली-नकली’ पहचान गए जनप्रतिनिधि : विशाल नैयर
इस मुद्दे पर आम लोगों में चर्चाएं रहीं कि आखिर इस बार जनप्रतिनिधि शहीदी दिवस वाले हवन-यज्ञ कार्यक्रम से किनारा क्यों कर गए। इस मामले में शहीद सुखदेव के असली वारिस होने का दावा करने वाले विशाल नैयर ने तंज कसा कि जनप्रतिनिधि तो क्या अब आम लोग भी असली-नकली का फर्क पहचान चुके हैं। नैयर ने दावा किया कि शहीद सुखदेव थापर उनकी माता संगीता नैयर के ताया के बेटे थे। इस बारे में उन्होंने काफी समय पहले तक्लानी डीसी रजत अग्रवाल को अपना फैमली-ट्री भी सौंपा था। साथ ही शहीद के पुश्तैनी घर के डॉक्यूमेंट सौंपे थे। जो उनकी संगीता नैयर के पिता प्रकाश चंद थापर के नाम पर रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
वह दलील देते हैं कि अगर हम शहीद के असली वारिस नहीं हैं तो अकाली सरकार में उनकी माता संगीता नैयर के बीमार होने पर सरकार ने शहीद के वारिस को मिलने वाली आर्थिक मदद भेजी थी। खुद तत्कालीन सीएम प्रकाश सिंह बादल ने उनसे फोन पर माताजी की तबियत को लेकर बात की थी।
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