गांव दयालपुरा में मुख्य लाइन से नई लाइन जोड़ने को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। एक पक्ष ने इसे निर्माणाधीन सोसायटी का सीवरेज कनेक्शन बताया, जबकि दूसरे ने नगर परिषद की मंजूरी से रेन वाटर लाइन बिछाने का दावा किया। विवाद की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर काम रुकवा दिया। संबंधित पक्ष को सोमवार तक मंजूरी और दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर परिषद का आधिकारिक पक्ष नहीं मिल सका।

जीरकपुर: गांव दयालपुरा में रविवार को एक लाइन को गांव की मुख्य लाइन से जोड़ने को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। एक पक्ष ने इसे निर्माणाधीन सोसायटी का कथित सीवरेज कनेक्शन बताते हुए विरोध किया, जबकि दूसरे पक्ष का दावा है कि नगर परिषद की मंजूरी के बाद रेन वाटर लाइन बिछाई जा रही थी। विवाद बढ़ने और दोनों पक्षों के आमने-सामने आने की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत करवाते हुए फिलहाल काम बंद करवा दिया। पुलिस ने लाइन बिछाने वाले पक्ष से सोमवार सुबह तक नगर परिषद की मंजूरी सहित संबंधित दस्तावेज पेश करने को कहा है।

ग्रामीण बोले- गांव की सीवरेज लाइन पर नहीं पड़ने देंगे अतिरिक्त बोझ

मौके पर मौजूद कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दयालपुरा को जीरकपुर-पटियाला हाईवे से जोड़ने वाली लिंक रोड पर एक बिल्डर की ओर से 100 से अधिक शोरूम बनाए गए हैं और इनके पीछे रिहायशी सोसायटी का निर्माण किया जा रहा है। उनका आरोप है कि इसी सोसायटी की सीवरेज लाइन को गांव की मुख्य सीवरेज लाइन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा था।

ग्रामीणों का दावा है कि शनिवार देर रात लाइन जोड़ने का काम किया जा रहा था। इसकी जानकारी मिलने पर गांव के कुछ युवा मौके पर पहुंचे और काम रुकवा दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मामले को लेकर गांव में दो गुट बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि बिना वैध मंजूरी किसी निजी प्रोजेक्ट का सीवरेज गांव की लाइन से नहीं जुड़ने दिया जाएगा।

दूसरा पक्ष बोला- सीवरेज नहीं, मंजूरी लेकर डाल रहे रेन वाटर लाइन

दूसरी ओर, दूसरे पक्ष के ग्रामीण परिवारों ने इन आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि मामले का संबंधित बिल्डर से कोई लेना-देना नहीं है। जमीन बेचने के दौरान उन्होंने कुछ हिस्सा अपने पास रखा था, जहां शोरूम बनाए गए हैं।

इस पक्ष का दावा है कि गांववासियों की सहमति और नगर परिषद से मंजूरी मिलने के बाद रेन वाटर लाइन बिछाई जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि काम के दौरान कुछ लोगों ने मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की। उनका कहना है कि नगर परिषद से मिली अनुमति सहित आवश्यक दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं, जिन्हें पुलिस के समक्ष पेश किया जाएगा।

दस्तावेज तय करेंगे लाइन की वैधता, ईओ से नहीं हो सका संपर्क

विवाद बढ़ने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत करवाकर काम रुकवा दिया। पुलिस ने संबंधित पक्ष को सोमवार सुबह तक नगर परिषद की मंजूरी, अनुमति पत्र और अन्य दस्तावेज दिखाने के लिए कहा है। दस्तावेजों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब नगर परिषद के रिकॉर्ड और अनुमति पत्रों की जांच से स्पष्ट होगा कि मौके पर डाली जा रही लाइन सीवरेज की है या रेन वाटर की और इसे गांव की मुख्य लाइन से जोड़ने की अनुमति दी गई है या नहीं।

मामले में नगर परिषद का पक्ष जानने के लिए कार्यकारी अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। वहीं जेई सवनीत से भी फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उनके छुट्टी पर होने के कारण नगर परिषद का आधिकारिक पक्ष नहीं मिल पाया।