लुधियाना के आत्म पार्क अंडरब्रिज के पास एनकाउंटर में मारे गए दो हथियारबंद आरोपियों को पुलिस ने मैरीलैंड पैलेस के रक्तदान शिविर में ‘मास शूटिंग’ का कथित टास्क मिलने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार करनजोत सिंह उर्फ नोना और संदीप सिंह के कब्जे से तीन ऑटोमेटिक पिस्तौल और करीब 50 कारतूस मिले। दोनों के डोनी बल्ल और शगनप्रीत से संपर्क की बात भी सामने आई है। पुलिस अब कथित साजिश के मास्टरमाइंड और संभावित टारगेट की जांच कर रही है।

लुधियाना: आत्म पार्क अंडरब्रिज के पास एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स पंजाब और लुधियाना कमिश्नरेट पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में दो हथियारबंद हमलावरों के मारे जाने के बाद अब इस मामले की परतें और गंभीर होती जा रही हैं। पुलिस ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि दोनों हमलावरों को रविवार को दुगरी रोड स्थित *मैरीलैंड पैलेस में आयोजित रक्तदान शिविर में ‘मास शूटिंग’ करने का काम सौंपा गया था।* इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर रक्तदान शिविर में किसे या किन लोगों को निशाना बनाया जाना था और इस कथित साजिश के पीछे असली मकसद क्या था।

पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा के मुताबिक मारे गए आरोपियों की पहचान *करनजोत सिंह उर्फ नोना और संदीप सिंह, दोनों निवासी सुल्तानविंड रोड, अमृतसर के रूप में हुई है। दोनों के कब्जे से **तीन आधुनिक ऑटोमेटिक पिस्तौल और करीब 50 जिंदा कारतूस* बरामद किए गए हैं। इतनी मात्रा में गोला-बारूद मिलने से पुलिस के ‘मास शूटिंग’ वाले दावे को गंभीरता मिलती है और जांच का दायरा केवल दो शूटरों तक सीमित नहीं रहता।

### *पुख्ता इनपुट के बाद लगाया था विशेष नाका*

पुलिस के अनुसार संभावित वारदात के संबंध में पहले से पुख्ता सूचना मिली थी। इसी आधार पर आत्म पार्क के निकट अंडरब्रिज पर विशेष नाकाबंदी की गई। इस दौरान बिना नंबर प्लेट की काली हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर आ रहे दो संदिग्धों को रुकने का इशारा किया गया।

पुलिस का दावा है कि दोनों ने रुकने की बजाय भागने का प्रयास किया और पीछा कर रही पुलिस पार्टी पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। *दो गोलियां सरकारी पुलिस वाहन पर भी लगीं।* इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें दोनों हथियारबंद आरोपी मारे गए।

घटनास्थल से फायरिंग के निशान, हथियार और अन्य साक्ष्य जुटाए गए हैं। फोरेंसिक और बैलिस्टिक जांच इस मुठभेड़ के घटनाक्रम को वैज्ञानिक रूप से स्थापित करने में महत्वपूर्ण होगी।

### *डोनी बल्ल ही नहीं, शगनप्रीत से भी सीधा संपर्क*

इस मामले में सबसे अहम आधिकारिक खुलासा यह है कि प्रारंभिक जांच में दोनों मृतकों के *गैंगस्टर डोनी बल्ल और शगनप्रीत के सीधे संपर्क में होने* की बात सामने आई है। पहले तक मामला मुख्य रूप से डोनी बल्ल गैंग के दो कथित शूटरों से जुड़ा बताया जा रहा था, लेकिन अब शगनप्रीत का नाम सामने आने से नेटवर्क का दायरा और बड़ा हो गया है।

अब जांच की अगली कड़ी दोनों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, इंटरनेट कॉल, सोशल मीडिया चैट और हालिया संपर्क हो सकते हैं। पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल होगा—*मास शूटिंग का आदेश किसने दिया, किसके माध्यम से दिया और कैंप के बारे में सटीक जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची?*

### *50 कारतूस—क्या कई लोगों को निशाना बनाने की थी तैयारी?*

तीन ऑटोमेटिक पिस्तौल के साथ करीब 50 जिंदा कारतूस मिलना सामान्य टारगेट किलिंग से अलग तस्वीर पेश करता है। इसी कारण पुलिस ने इसे ‘मास शूटिंग’ की साजिश बताया है।

यदि पुलिस का यह दावा जांच में पुष्ट होता है तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि रक्तदान शिविर में मौजूद किन लोगों की जान खतरे में थी। क्या हमलावरों के पास कोई विशेष टारगेट लिस्ट थी? क्या किसी खास व्यक्ति के आने की जानकारी उन्हें पहले से दी गई थी? या उन्हें भीड़ के बीच अंधाधुंध गोलीबारी करने के निर्देश दिए गए थे?

स्थानीय स्तर पर इस रक्तदान शिविर को रवि ख्वाजके की स्मृति से जोड़कर भी चर्चा सामने आई है। ऐसे में पुराने विवाद और रंजिश की दिशा में भी जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि असली निशाना कौन था, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

### *2016 की कड़ी की भी हो जांच*

यदि रक्तदान आयोजन का संबंध रवि ख्वाजके की स्मृति से था, तो पुरानी आपराधिक रंजिशों का रिकॉर्ड दोबारा खंगाला जाना महत्वपूर्ण हो सकता है। सवाल यह है कि क्या करीब एक दशक पुरानी किसी दुश्मनी को नए गैंग नेटवर्क के जरिए फिर सक्रिय किया जा रहा था?

यह भी जांच का विषय है कि कैंप में आने वाले किन लोगों के डोनी बल्ल या शगनप्रीत गुट के साथ पुराने विवाद रहे हैं। यही जांच कथित ‘मास शूटिंग’ की वास्तविक वजह सामने ला सकती है।

### *दोनों का आपराधिक रिकॉर्ड भी आया सामने*

सीपी स्वपन शर्मा के मुताबिक करनजोत सिंह उर्फ नोना के खिलाफ पहले से *आर्म्स एक्ट, डकैती और एनडीपीएस एक्ट से जुड़े दो आपराधिक मामले* दर्ज थे। वहीं संदीप सिंह के खिलाफ भी एक आपराधिक मामला दर्ज बताया गया है।

इससे यह स्पष्ट है कि पुलिस अब इनके पुराने मामलों और वर्तमान गैंग कनेक्शन के बीच संबंध तलाशेगी। खासकर यह देखा जाएगा कि दोनों कब और कैसे डोनी बल्ल-शगनप्रीत नेटवर्क से जुड़े।

### *लुधियाना में कौन कर रहा था मदद?*

अमृतसर के दो हथियारबंद लोगों को लुधियाना के किसी विशेष कार्यक्रम में वारदात करने के लिए भेजे जाने का दावा अपने आप में स्थानीय नेटवर्क पर सवाल खड़ा करता है। कार्यक्रम का समय, स्थान, संभावित टारगेट और आने-जाने के रास्ते की जानकारी उन्हें किसने दी?

क्या किसी स्थानीय व्यक्ति ने रेकी की थी? बिना नंबर की मोटरसाइकिल किसने उपलब्ध करवाई? दोनों शहर में कब पहुंचे और कहां रुके? हथियार वे अपने साथ लाए थे या लुधियाना में किसी संपर्क से मिले? ये सवाल अब जांच की केंद्रीय कड़ी बन सकते हैं।

### *FIR दर्ज, साथियों की तलाश में छापेमारी*

थाना मॉडल टाउन में *बीएनएस की धाराओं 109, 221, 132, 62 और 111 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25* के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने साफ किया है कि मारे गए आरोपियों के अन्य साथियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।

अब एनकाउंटर से बड़ी कहानी उस नेटवर्क की है जो इसके पीछे होने का शक है। *तीन ऑटोमेटिक पिस्तौल, 50 कारतूस, रक्तदान शिविर में ‘मास शूटिंग’ का कथित टास्क और डोनी बल्ल-शगनप्रीत से सीधा संपर्क—ये सभी कड़ियां संकेत देती हैं कि जांच अभी शुरुआत में है।*

सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—*मैरीलैंड पैलेस के रक्तदान कैंप में आखिर किसे निशाना बनाया जाना था, और क्या पुलिस ने दो शूटरों को खत्म करने के साथ किसी बड़ी गैंगवार की शुरुआत को समय रहते रोक दिया?*