पंजाब में ड्रग्स की सप्लाई का पैटर्न बदलता दिख रहा है। पुलिस के अनुसार ड्रोन तस्करी पर कार्रवाई से पाकिस्तान सीमा से आने वाली हेरोइन की उपलब्धता कम हुई है, लेकिन दूसरे राज्यों से फार्मास्युटिकल दवाओं की सप्लाई नई चुनौती बन रही है। पुलिस ने नौ एंटी-ड्रोन सिस्टम, 52 रिस्पॉन्स टीमें और 64 सेकंड-लाइन चौकियां तैनात की हैं। मार्च 2025 से अभियान में करीब 80 हजार गिरफ्तारियां हुईं और 486 ड्रोन बरामद किए गए।

चंडीगढ़: पंजाब में ड्रग्स की समस्या में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है; पाकिस्तान बॉर्डर से तस्करी होकर आने वाली हेरोइन की सप्लाई कम हो गई है। हालांकि, दूसरे राज्यों से आने वाली फार्मास्युटिकल दवाएं राज्य की एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन रही हैं। लेकिन पंजाब पुलिस को इस बात से राहत मिल सकती है कि कम से कम एक बड़ी समस्या आंशिक रूप से हल हो गई है।

पंजाब पुलिस ने रविवार को कहा कि ड्रोन के ज़रिए होने वाली तस्करी के खिलाफ लगातार कार्रवाई से राज्य में सड़क पर बिकने वाली हेरोइन की उपलब्धता कम हुई है। हालांकि, इस कार्रवाई से एक नई सप्लाई चेन का भी पता चला है, जिसमें राज्य के बाहर के मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से फार्मास्युटिकल दवाएं पंजाब लाई जा रही हैं।

यह बदलाव पहले के पैटर्न से बिल्कुल अलग है, जब माना जाता था कि पंजाब में मिलने वाली ज़्यादातर ड्रग्स पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा से राज्य में आती थीं।

पुलिस ने कहा कि सप्लाई के बदलते पैटर्न की वजह से राज्यों के बीच तालमेल बहुत ज़रूरी हो गया है। पंजाब इस मुद्दे को संबंधित राज्य सरकारों के साथ उठाना चाहता है ताकि फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की कड़ी निगरानी हो सके और उन दवाओं की बिक्री, खरीद और ट्रांसपोर्टेशन की बेहतर जांच हो सके जिन्हें अवैध ड्रग्स के कारोबार में इस्तेमाल किया जा सकता है।

यह बदलाव सीमा पार नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ तेज़ की गई कार्रवाई के बीच आया है। पंजाब पुलिस ने बॉर्डर वाले इलाकों में नौ एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए हैं, जिनमें अमृतसर, तरनतारन और फिरोजपुर में काम करने वाली तीन 'बाज अख' (Baaj Akh) यूनिट्स और रणनीतिक जगहों पर लगाए गए तीन 'ड्रोन सेंस D200 प्रो' (Drone Sense D200 Pro) सिस्टम शामिल हैं।

एंटी-ड्रोन नेटवर्क को 52 ड्रोन-रिस्पॉन्स टीमों का सहयोग मिल रहा है, जिनमें 147 जवान शामिल हैं। इसके अलावा, लगभग 600 जवानों वाली 64 'सेकंड-लाइन' चौकियां (नाके) भी तैनात की गई हैं, जबकि 585 जगहों पर लगे 2,367 CCTV कैमरे संवेदनशील इलाकों की निगरानी में मदद करते हैं।

बॉर्डर वाले गांवों की 'विलेज डिफेंस कमेटियों' (Village Defence Committees) को भी निगरानी और रिस्पॉन्स सिस्टम में शामिल किया गया है; पुलिस इन्हें ज़मीनी स्तर पर अपनी "आंखें और कान" बताती है।

पुलिस के अनुसार, मार्च 2025 में शुरू किए गए 'युद्ध नशियां विरुद्ध' (Yudh Nashiyan Virudh) अभियान के तहत तेज़ की गई कार्रवाई से लगभग 80,000 गिरफ्तारियां हुई हैं। फोर्स ने 486 ड्रोन बरामद करने की भी जानकारी दी है। वित्तीय जांच के बाद 336 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति ज़ब्त की गई है।

इसलिए, पंजाब के लिए ड्रग्स के ख़िलाफ़ लड़ाई का अगला चरण बॉर्डर पर खेप रोकने के बजाय उस सप्लाई चेन का पता लगाने पर ज़्यादा केंद्रित हो सकता है, जो राज्य से सैकड़ों किलोमीटर दूर शुरू होती है।