जीरकपुर : त्योहारों का सीजन नजदीक आते ही दूध, पनीर और मिठाइयों की मांग बढ़ने वाली है। इससे पहले जीरकपुर में सड़क किनारे एक वाहन से दूसरे वाहन में पनीर शिफ्ट किए जाने का मामला सामने आया है। के-एरिया लाइट प्वाइंट से सुखना चौक के बीच एक महिंद्रा पिकअप से पनीर निकालकर निजी वाहन में रखा जा रहा था। वहां से गुजर रहे राहगीरों ने इसे देखा तो वीडियो बनाकर ढकोली पुलिस को सूचना दे दी।
सूचना मिलने पर ढकोली पुलिस की पीसीआर मौके पर पहुंची। पुलिस दोनों वाहनों और उनके चालकों को ढकोली थाने ले गई। इसके बाद फूड सेफ्टी विभाग को मामले की जानकारी दी गई। दोपहर बाद विभाग की टीम थाने पहुंची और पनीर के नमूने लेकर सील किए।
अब नमूनों को जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि पनीर निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है।
मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि त्योहारों के दौरान पनीर और दूध से बने उत्पादों की खपत कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में इनकी गुणवत्ता के साथ भंडारण और परिवहन के दौरान स्वच्छता की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
राहगीरों की नजर पड़ी, विभाग की क्यों नहीं?
घटना ने खाद्य सुरक्षा विभाग की फील्ड मॉनिटरिंग को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क पर एक वाहन से दूसरे वाहन में पनीर शिफ्ट किया जा रहा था, लेकिन कार्रवाई की शुरुआत विभाग की नियमित जांच से नहीं बल्कि राहगीरों द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने के बाद हुई।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि त्योहारों से पहले जब दूध, पनीर, खोया और मिठाइयों की मांग बढ़ने लगती है तो विभाग की टीमें बाजारों, डेयरियों, मिठाई की दुकानों और खाद्य सामग्री की सप्लाई करने वाले वाहनों की कितनी नियमित जांच करती हैं। यदि राहगीर सड़क से गुजरते समय ऐसी गतिविधि देख सकते हैं तो विभाग की फील्ड टीम की नजर क्यों नहीं पड़ी?
सैंपल पास हुआ तो भी परिवहन के तरीके पर उठेगा सवाल
मामले में केवल पनीर की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि उसे एक वाहन से दूसरे वाहन में शिफ्ट किए जाने की परिस्थितियां भी जांच का विषय हैं। लैब रिपोर्ट में नमूना मानकों पर खरा उतरता है तो भी यह स्पष्ट किया जाना जरूरी होगा कि पनीर किस स्थान से लाया गया था, कहां पहुंचाया जाना था और जिस तरीके से उसे स्थानांतरित किया जा रहा था, वह खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता संबंधी निर्धारित नियमों के अनुरूप था या नहीं।
वहीं, यदि नमूना जांच में मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो संबंधित सप्लायर अथवा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विभाग क्या कार्रवाई करता है, इस पर भी नजर रहेगी।
मिलीभगत के आरोप की पुष्टि नहीं
घटना के बाद कुछ स्थानीय लोगों ने विभागीय मिलीभगत की आशंका भी जताई है। हालांकि ऐसे किसी आरोप की फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच और लैब रिपोर्ट के बिना किसी व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि त्योहारों से पहले खाद्य पदार्थों की जांच के लिए विभाग अपनी फील्ड निगरानी कितनी बढ़ाता है और इस मामले में नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद क्या कार्रवाई की जाती है।