हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी का पर्सिमोन फल अब रेल के जरिए बड़े बाजारों तक पहुंच रहा है। फिरोजपुर मंडल ने पहली बार लुधियाना से हावड़ा तक इसकी रेल ढुलाई शुरू की। 12 सितंबर को अमृतसर-हावड़ा मेल के एसएलआर से 98 पैकेटों में 2,600 किलो पर्सिमोन भेजा गया। फिलहाल फल हावड़ा, कोलकाता और सियालदह पहुंचाया जा रहा है, जबकि जल्द पटना और गुवाहाटी को भी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

अमृतसर (आर. के. उप्पल) : हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में उत्पादित पर्सिमोन फल, जिसे ‘जापानी फल’ और ‘अमरफल’ के नाम से भी जाना जाता है, अब रेल के माध्यम से देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है। फिरोजपुर मंडल ने पहली बार लुधियाना से हावड़ा तक पर्सिमोन की रेल ढुलाई शुरू कर नई उपलब्धि हासिल की है।

मंडल रेल प्रबंधक संजीव कुमार के मार्गदर्शन में बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट के विशेष प्रयासों से यह नया माल यातायात प्राप्त हुआ। 12 सितंबर को ट्रेन संख्या 13006 अमृतसर–हावड़ा मेल के एसएलआर में लुधियाना रेलवे स्टेशन से पर्सिमोन की आउटवर्ड लोडिंग सफलतापूर्वक की गई। कुल 98 पैकेटों में 2,600 किलोग्राम पर्सिमोन हावड़ा के लिए भेजा गया।
कुल्लू सहित हिमाचल के ठंडे बागवानी क्षेत्रों में किसान पर्सिमोन की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कम लागत, बेहतर मूल्य और बढ़ती घरेलू मांग के कारण इसकी खेती को बढ़ावा मिल रहा है। विटामिन-सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह कम कैलोरी वाला पौष्टिक फल है।

फिलहाल पर्सिमोन को हावड़ा, कोलकाता और सियालदह भेजा जा रहा है। आगामी दिनों में पटना और गुवाहाटी जैसे अन्य प्रमुख गंतव्यों को भी रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक/फ्रेट परमदीप सिंह सैनी ने कहा कि मंडल की विश्वसनीय और समयबद्ध माल परिवहन व्यवस्था व्यापारियों को बेहतर सुविधा दे रही है।