जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न) : सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व स्थानीय गुरुद्वारों में अत्यंत श्रद्धा, धूमधाम और सत्कार के साथ मनाया गया। इस दौरान शहर के सभी गुरु घरों में भारी संख्या में संगतों ने नतमस्तक होकर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुख्य राज्य स्तरीय समागम गुरुद्वारा माता साहिब कौर (हीरा बाग) में आयोजित किया गया। इस पावन अवसर पर प्रसिद्ध कीर्तनी जत्थे भाई अर्शदीप सिंह जी ने अपने मधुर स्वर में रसभिना कीर्तन प्रस्तुत किया। शबादों की गूंज और ‘वाहेगुरु’ की पवित्र धुनों ने उपस्थित संगतों को पूरी तरह अध्यात्मिक रंग में रंग दिया, जिससे पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया।
गुरुद्वारा प्रबंधक अपार सिंह जी ने संगत को प्रकाश पर्व की बधाई देते हुए इसके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव जी ने अन्य गुरु साहिबान की वाणी को एकत्र कर भाई गुरुदास जी से 'पोथी साहिब' की संपूर्ण रचना कराई थी, ताकि इस धुर की वाणी में कोई मिलावट न कर सके। उन्होंने यह भी साझा किया कि पोथी साहिब की संपूर्णता तक गुरु साहिब ने करीब चार साल तक श्री रामसर और श्री हरिमंदिर साहिब की सीमा नहीं छोड़ी। दुनिया में ऐसा कोई अन्य रहबर या पैगंबर नहीं हुआ जिसने स्वयं अपनी वाणी लिखकर संकलित की हो, यह अनूठा इतिहास केवल सिख गुरुओं के पास है।
धार्मिक दीवान की समाप्ति के उपरांत गुरु का अटूट लंगर बरता गया। इस मौके पर दीपिंदर सिंह भंडारी, हरविंदर सिंह चावला, अमरजीत सिंह उबराय, कविता कक्कड़, हरजीत कौर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य और शहरवासी उपस्थित रहे।