पंजाब की जेलों में नशे की गंभीर समस्या सामने आई है। सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि 35,449 कैदियों में 15,768 नशे पर निर्भर हैं। अदालत ने इसे बेहद गंभीर स्थिति बताते हुए सरकार से प्रभावी नीति और स्थायी समाधान तलाशने को कहा। OOAT क्लीनिकों में बड़ी संख्या में कैदी उपचार करा रहे हैं। मामले की अब साप्ताहिक सुनवाई होगी और अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।

चंडीगढ़: पंजाब की जेलों में बंद कैदियों में नशे की समस्या की गंभीर तस्वीर सामने आई है। पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को बताया कि राज्य की जेलों में बंद कुल 35,449 कैदियों में से 15,768 नशे पर निर्भर हैं। यानी जेलों की कुल कैदी आबादी का 44 प्रतिशत से अधिक हिस्सा नशे की गिरफ्त में है।

मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति राजेश गौर की पीठ ने राज्य की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस आंकड़े को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में नशे के आदी कैदी अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दौर यानी युवावस्था में हैं। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को इस समस्या को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि इन कैदियों को नशे की निर्भरता से बाहर निकालने के लिए सरकार की नीति क्या है। उन्होंने टिप्पणी की कि इससे अधिक गंभीर स्थिति और क्या हो सकती है।

अदालत ने यह चिंता भी जताई कि यदि जेलों में नशे के आदी कैदियों को उनकी निर्धारित दवाएं नहीं दी गईं तो उन्हें स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस समस्या का कोई स्थायी समाधान तलाशना जरूरी है।

OOAT क्लीनिकों में बड़ी संख्या में कैदी करा रहे इलाज

मामले की शुरुआत जुलाई में हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद हुई थी। यह कार्रवाई मानसा सत्र न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधीश की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि जेलों में नशे के आदी कैदियों को ब्यूप्रेनॉर्फिन और नालोक्सोन की दवाएं दी जा रही हैं। उनकी चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर दवा की मात्रा एक से चार गोलियों तक हो सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 767 कैदियों वाली एक जेल में 530 कैदी जेल परिसर में चल रहे आउट-पेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट यानी OOAT क्लीनिक में पंजीकृत थे। यह संख्या जेल की कुल आबादी का करीब 69 प्रतिशत थी, जो जेलों के भीतर नशे की समस्या की भयावहता को दर्शाती है।

20 अगस्त को हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से प्रत्येक जेल में कैदियों की कुल संख्या और OOAT क्लीनिक में पंजीकृत कैदियों का विस्तृत आंकड़ा मांगा था। अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता तनु बेदी को मामले में एमिकस क्यूरी भी नियुक्त किया है।

कोर्ट ने कहा कि नशे पर निर्भर कैदियों को हमेशा के लिए ऐसी स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता। मामले की अब हर सप्ताह सुनवाई होगी। अदालत ने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से भी अपनी-अपनी जेलों में नशे पर निर्भर कैदियों का विवरण मांगा है। केंद्र सरकार को भी मामले में सहयोग करने को कहा गया है।

अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 8 सितंबर की तारीख तय की है। साथ ही चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से पेश अधिवक्ता अभिनव सूद से PGIMER के निदेशक समेत स्वास्थ्य अधिकारियों से इस मामले में विशेषज्ञ सहायता लेने को कहा गया है।