होशियारपुर (दलजीत अज्नोहा) : भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क प्रसव-पूर्व स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किए गए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) ने आज सफलतापूर्वक अपने 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह अभियान 09 जून 2016 को शुरू किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य देश की गर्भवती महिलाओं, विशेषकर दूसरी और तीसरी तिमाही वाली महिलाओं को निःशुल्क, व्यापक एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसव-पूर्व जांच (ANC) सेवाएं प्रदान करना है। आज यह अभियान देशभर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए सी.एच.सी हारटा बडला के सीनियर मेडिकल अधिकारी डॉ. मनप्रीत सिंह बैंस ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के अंतर्गत प्रत्येक माह की 09 तारीख को विशेष PMSMA सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिनमें गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की जाती है। यदि 09 तारीख रविवार या किसी सरकारी अवकाश के दिन हो, तो यह सत्र अगले कार्य दिवस पर आयोजित किया जाता है। सत्र के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा रक्तचाप, एनीमिया, मधुमेह तथा गर्भावस्था से संबंधित अन्य जटिलताओं की जांच की जाती है। उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की पहचान कर उनकी विशेष निगरानी एवं उपचार सुनिश्चित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों के दौरान इस अभियान ने देशभर में लाखों गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा है तथा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान करके मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इससे सुरक्षित प्रसव और स्वस्थ मां-बच्चे को बढ़ावा मिला है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में देशभर के 22,000 से अधिक सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों (जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों) में यह सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इस संबंध में आगे जानकारी देते हुए मेडिकल अधिकारी डॉ.कृतिका अत्तरी ने बताया कि इस अभियान को और अधिक सशक्त बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा जनवरी 2022 में 'एक्सटेंडेड PMSMA' की शुरुआत की गई। इसके अंतर्गत प्रत्येक माह की 23 तारीख को उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग तथा सुरक्षित प्रसव तक उनकी निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाती है। इस कार्य के लिए आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं एवं लाभार्थियों को वित्तीय प्रोत्साहन राशि (Incentives) भी प्रदान की जाती है। ‘
सी.एच.सी में आज इस अवसर पर आयोजित विशेष सत्र के दौरान गर्भवती महिलाओं से अपील की गई कि वे अपनी गर्भावस्था की दूसरी अथवा तीसरी तिमाही के दौरान प्रत्येक माह की 09 तारीख को स्वास्थ्य केंद्र में आकर इस निःशुल्क सेवा का लाभ अवश्य उठाएं। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूरे होना भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। हमारा संकल्प है कि देश में प्रसव के दौरान एक भी मां की मृत्यु न हो। 'सुरक्षित मां, सुरक्षित बच्चा' ही एक विकसित भारत की नींव है।"