62वें स्थापना दिवस पर भावाधस में दिखा उत्साह

लुधियाना: भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज (भावाधस) द्वारा मुख्य संचालक वीरश विजय दानव की अगुवाई में स्थानीय पंजाबी भवन पर संस्था का 62वां जन्मदिन मनाया गया। इस मौके पर राष्ट्रीय संचालक कर्मयोगी चौधरी यशपाल ने विशेष रूप से सहभागिता की। इस दौरान सबसे पहले मुक्ति माला का पाठ करके आज का समारोह शुरू किया गया और पूरे भावाधस नेताओं द्वारा भावाधस के संस्थापक प्रथम आदि धर्म गुरु ब्रह्मलीन प्रभु ऋषीनाथ रतनाकर जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

इस मौके पर संत विसरवा ऋषि जी भावाधस में शामिल हुए। इस मौके पर विजय दानव ने कहा कि 24 मई 1964 को लुधियाना की पवित्र और पुण्य भूमि पर प्रभु रतनाकर जी द्वारा भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज की नींव रखी गई थी। उन्होंने कहा कि आदि नितनेम, सच्ची प्रार्थना, शारशब्द आदि उन्हीं की कौम को दी हुई विरासत हैं।

इस मौके पर माता उषा मति द्रविड़, अश्वनी भील, अक्षय राज, रोहित सहोता, विमल भट्टी, राजेंद्र हंस, महक सिंह चौहान, सुधीर धारिवाल, श्याम बोह्त, सुरेंद्र सोदाई, संजय दिसावर, जितेंद्र घवरी, सुरेश सैली, संजीव बेगड़ा, अशोक दानव, धर्मवीर मचल, लकी सर्वट्टा, दीपू घई, एकलव्य बरुट, लव दाविड़, शिव बिडलान, विजय चौहान, सिकंदर चौहान, वीरांगी राज रानी, मदन धारिवाल, कन्नौज दानव आदि हाज़िर थे।