शिमला: शिमला में नए मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। राज्य के कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी इस अहम पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, सरकार जल्द ही नए मुख्य सचिव के नाम पर फैसला ले सकती है। इस पद के लिए अनुभव, वरिष्ठता और प्रशासनिक दक्षता को प्रमुख आधार माना जा रहा है।
मुख्य सचिव का पद राज्य प्रशासन में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, जो सरकार की नीतियों के क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के समन्वय में अहम भूमिका निभाता है।
1988 बैच के आईएएस अधिकारी संजय गुप्ता को अक्टूबर 2025 में तत्कालीन मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की सेवानिवृत्ति के बाद कार्यवाहक मुख्य सचिव बनाया गया था। दिलचस्प बात यह रही कि वरिष्ठ होने के बावजूद उन्हें इससे पहले भाजपा और कांग्रेस, दोनों सरकारों के समय शीर्ष पद नहीं मिल पाया था। भाजपा सरकार के दौरान आरडी धीमान को मुख्य सचिव बनाया गया था, जबकि बाद में कांग्रेस सरकार ने प्रबोध सक्सेना को यह जिम्मेदारी सौंपी थी।
अब वरिष्ठता के लिहाज़ से नए मुख्य सचिव की दौड़ में सबसे आगे 1993 बैच के आईएएस अधिकारी केके पंत का नाम माना जा रहा है। वह इस समय अतिरिक्त मुख्य सचिव के तौर पर वन और गृह विभाग संभाल रहे हैं। उत्तराखंड के पंत फिलहाल हिमाचल कैडर में कार्यरत सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। उनके पास दिसंबर 2030 तक लंबा कार्यकाल बचा हुआ है, जिसे उनकी बड़ी मजबूती माना जा रहा है।
इसके अलावा 1994 बैच की आईएएस अधिकारी अनुराधा ठाकुर का नाम भी चर्चा में है। वह इस समय केंद्र सरकार में वित्त मंत्रालय के तहत आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव के पद पर तैनात हैं। हालांकि जानकारी के मुताबिक उनके केंद्र में ही बने रहने की संभावना अधिक मानी जा रही है।
1994 बैच के ही अधिकारी ओंकार शर्मा भी दावेदारों में शामिल हैं। वह इस समय अतिरिक्त मुख्य सचिव (जनजातीय विकास) के पद पर कार्यरत हैं। हिमाचल प्रदेश के चंबा के पांगी क्षेत्र से आने वाले ओंकार शर्मा को प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक स्वीकार्यता के लिहाज से मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है। हालांकि बहुचर्चित चीफ इंजीनियर विमल नेगी मौत प्रकरण की जांच रिपोर्ट तैयार करने के मामले में राज्य सरकार ने उनसे कई महत्वपूर्ण विभाग वापस के लिए थे।
इसी बीच 1995 बैच के आईएएस अधिकारी भारत खेड़ा का नाम भी धीरे-धीरे चर्चा में आ रहा है। वह फिलहाल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि अगर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी कार्यशैली और प्राथमिकताओं के अनुरूप किसी अधिकारी को चुनना चाहें, तो भरत खेड़ा भी अहम विकल्प बन सकते हैं। इससे पहले भरत खेड़ा मुख्यमंत्री सुक्खू के प्रधान सचिव रहे हैं। जनवरी 2024 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के तौर पर केंद्र सरकार में नियुक्ति मिली थी। भरत खेड़ा को उपभोक्ता मामले मंत्रालय में बतौर अतिरिक्त सचिव पद पर तैनात किया गया था।
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में संभावित नामों को लेकर अटकलें जारी हैं, हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।