गाज़र दिवस मनाने का मकसद पौष्टिक अहारों के प्रति लोगों में जनजागरण बढ़ाना है
वर्तमान जंक व चाइनीस फूड वाले युग में पोषक तत्वों से भरपूर नेचुरल व इम्युनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ व फलों का सेवन ज़रूरी-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र।
गोंदिया – वैश्विक स्तरपर प्रतिवर्ष देखते हैं कि वर्ष के अनेकों दिन किसी न किसी दिवस के रूप में मनाए जाते हैं, जो उसे विषय पर जनहित में जनजागरण फैलाने के लिए मनाए जाते है। पूरी दुनियाँ के मानवीय जीवों को सुचारू रूप से चलने के लिए अनेकों आवश्यकताओं में आधारभूत स्वास्थ्य व्यवस्था भी शामिल है। बड़े बुजुर्गों का मानना है कि जीव है, तो जहान है,यानें जीव सुरक्षित तब रहेगा जब वह स्वस्थ होगा, वह स्वस्थ तभी रहेगा जब उसमें भरपूर इम्यूनिटी हो,जो कि सभी प्रकार के रोगों से लड़ने में इम्यूनिटी काम आती है। जीव द्वारा पौष्टिक अहारों के खाने से स्ट्रांग होती है इसलिए अपने जीवन का सच्चा सुख आनंद तभी उठा पाएंगे जब हम स्वस्थ रहेंगे। आज हम इस विषय पर चर्चा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि 4 अप्रैल 2025 को अंतर्राष्ट्रीय गाजर दिवस है, जिसमें पूरी दुनियाँ में संजीगी से मनाया जाता है, ताकि पौष्टिक आधार के प्रति लोगों मैं जन जागरण फैलाया जा सके ताकि उनका जीवन सुख में स्वस्थ होता के वह अपना जीवन सुचारु रूप से चला कर देश सेवा में सहभागी बने। वर्तमान जंक व चाइनीस फूड वाले युग में पोषक तत्वों से भरपूर नेचुरल इम्युनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ व फलों का सेवन जरूरी है, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे। अंतरराष्ट्रीय गाजर दिवस 4 अप्रैल 2025, गाजर खाओ स्वास्थ्य बनाओ। कुदरत के कायदे गाजर से फायदे।
साथियों बात अगर हम गाजर दिवस मनाने की करें तो, साल 2003 अंतर्राष्ट्रीय गाजर दिवस की स्थापना की गई और इस के बाद से ही 2012 यह विश्व के अलग अलग कोनो तक पहुंचा।जानकारों का मानना है कि एशिया के लोगों ने सबसे पहले गाजर की खेती की शुरुआत की थी।हर साल 4 अप्रैल को विश्व गाजर दिवस के रूप में मनाया जाता है।इसका मकसद लोगों को गाजर के फायदे से रूबरू कराना। दरअसल एक तरफ जहां देश भर में जंक फूड से जुड़े दिवस पर काफी जोर दिया जा रहा है। वहीं गाजर दिवस मनाने का मकसद है देश के लोगों के बीच पौष्टिक आहारों के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ाई जा सके। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय गाजर दिवस, गाजर की सभी विभिन्न किस्मों के बारे में और इसके और फायदे जानने का एक सही अवसर है।
साथियों बात अगर हम गाजर खाने के फायदों की करें तो,जानकारों का मानना है कि गाजर की मूल उत्पत्ति पंजाब और कश्मीर की पहाड़ियो में हुई, वहीं ये चार अलग अलग रंगों की पाई जाती है। लाल, पीली संतरा औऱ काली और सभी के अपने अपने फायदे हैं।जानते हैं इससे मिलने वाले फायदे के बारे में,गाजर खाने के फायदे- आंख -.गजर आंखों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।बीटा कैरोटीन, अल्फा कैरोटीन ल्यूटीन नामक ऑर्गेनिक पिगमेंट होता है जो गाजर में समृद्ध मात्रा में पाया जाता है. उम्र के साथ होने वाली आंखों के समस्या में आराम दिलवाने में बीटा कैरोटीन मदद कर सकता है. इसके अलावा इसमें अन्य खनिज जैसे विटामिन सी भी पाया जाता है जो बढ़ती उम्र के कारण होने वाले मैक्यूलर डीजेनरेशन से आराम दिलाने में मददगार होता है।दिल- गाजर खाने से दिल के मरीजों को भी फायदा पहुंच सकता है। यह खून में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित कर हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकता है, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स दिल के लिए फायदेमंद है,इसके अलावा गाजर में मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करती है। गाजर में पाए जाने वाले फाइबर वजन को कंट्रोल कर सकता है और दिल की बीमारियों की संभावना को कम कर सकता है। इसके अलावा लाल गजब की बात करें तो इसमें लाइकोपिन होता है जो हिर्दय रोग को रोकता है। इम्यूनिटी -गाजर में एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी गुण होते हैं जो इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद बीटा कैरोटीन और ऑर्गेनिक कंपाउंड शरीर को कई संक्रामक बीमारियों से बचाने का काम करता है, यह सभी कंपाउंड बीमारी के बाद शरीर में रिकवरी में तेजी लाता है पाचन- गाजर में फाइबर की मौजूदगी आपको कब्ज से राहत दिला सकती है। अगर आपका पेट साफ नहीं हो रहा है तो कुछ कच्चे गाजर को अपने डाइट में शामिल कर लें, इससे मल त्यागने में आसानी होती है, इसके अलावा गाजर हड्डियों को स्वस्थ रखने में भी मदद कर सकता है, क्यों कि इसमें कैल्शियम की मात्रा भी पाई जाती है। त्वचा- गाजर में मौजूद beta-carotene एक प्रभावी एंटी ऑक्सीडेंट है जो एंटी एजिंग के साइंस को कम करता है।व
साथियों बात अगर हम गाजर की कुछ साफ बातों की करें तो, गाजर के बारे में कुछ खास बातेंः (1) गाजर को कच्चा, भुना हुआ, भाप में पकाया हुआ या सूप और स्मूदी में मिलाकर खाया जा सकता है। (2) गाजर का जूस, जो अपने ताज़ा स्वाद और स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है। (3) गाजर रसोई में अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जानी जाती है। (4) गाजर सूप, स्टू और सलाद में भी एक लोकप्रिय सामग्री है। (5) गाजर अदरक, लहसुन, शहद और बाल्समिक सिरका सहित विभिन्न स्वादों के साथ अच्छी तरह से मेल खाते हैं। (6) गाजर घोड़ों और दूसरे पशुओं के लिए भी एक लोकप्रिय व्यंजन है। (7) गाजर शब्द ग्रीक शब्द कैरोटॉन से आया है जिसका मतलब है सींग या जड़। अंतर्राष्ट्रीय गाजर दिवस दुनिया भर के गाजर प्रेमियों के लिए है और इसे गाजर खाने और गाजर पार्टियों के आयोजन के साथ मनाया जाता है। इसे 2003 में सब्जी के बारे में जानकारी फैलाने के लिए बनाया गया था। यह समझ में आता है कि गाजर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है, क्योंकि वे दुनिया की दस सबसे आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण सब्जियों में से एक हैं। गाजर जड़ वाली सब्ज़ियाँ हैं। वे आम तौर पर नारंगी रंग की होती हैं, हालाँकि वे लाल, बैंगनी, काली, सफ़ेद या पीली भी हो सकती हैं। यह रंग की मुख्य जड़ है जिसे सबसे ज़्यादा खाया जाता है, हालाँकि पत्तियाँ और बीज भी खाए जा सकते हैं, और इसीलिए मूल रूप से पौधों की खेती की जाती थी। आधुनिक गाजर जंगली गाजर से पालतू बनाए गए थे, जो संभवतः फारस में उत्पन्न हुए थे, एक ऐसा क्षेत्र जो अब अफ़गानिस्तान और ईरान है। उन्हें बड़े, कम लकड़ीदार और कड़वे स्वाद वाले, और अधिक मीठे होने के लिए चुनिंदा रूप से पाला गया था। लेखन में उल्लेख है कि पहली शताब्दी ई. में रोम के लोग संभवतः गाजर खाते थे। छठी शताब्दी के ग्रीक जुलियाना एनिसिया कोडेक्स में गाजर की तीन अलग-अलग किस्मों का उल्लेख किया गया है। आठवीं शताब्दी में गाजर स्पेन में पहुँची, और आज हम जिस आधुनिक गाजर से परिचित हैं, उसकी खेती सबसे पहले दसवीं शताब्दी के आसपास अफ़गानिस्तान में की गई थी। यह गाजर आमतौर पर बैंगनी या पीले रंग की होती है जिसकी जड़ें शाखायुक्त होती हैं और इसे पूर्वी गाजर कहा जाता है। चौदहवीं शताब्दी तक खेती की गई गाजर चीन और अठारहवीं शताब्दी तक जापान पहुँच गई। सत्रहवीं शताब्दी में यूरोपीय लोगों द्वारा उन्हें औपनिवेशिक अमेरिका लाया गया। पश्चिमी गाजर आमतौर पर नारंगी रंग की होती हैं और सत्रहवीं शताब्दी में नीदरलैंड में इसकी खेती शुरू हुई। गाजर को बीज से परिपक्व होने में तीन से चार महीने लगते हैं और इसमें कैरोटीन, विटामिन के और विटामिन बी6 की उच्च मात्रा होती है। इन्हें कई तरीकों से खाया जा सकता है: कच्चा (1980 के दशक में बेबी गाजर का विपणन किया जाने लगा), सलाद में, कटा हुआ और उबला हुआ, तला हुआ, भाप में पकाया हुआ, सूप और स्टू में और शोरबा में। इन्हें चिप्स, फ्लेक्स और पाउडर में बनाया जा सकता है; केक, पुडिंग, जैम और प्रिजर्व बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है;और जूस में बनाया जा सकता है। इन्हें शिशु और पालतू जानवरों के भोजन में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय गाजर दिवस के इतिहास व महत्व की करें तो,अंतर्राष्ट्रीय गाजर दिवस का इतिहास-गाजर का वानस्पतिक नाम डाकस कैरोटा है। जानकारों का मानना है कि एशिया के लोगों ने सबसे पहले गाजर की खेती की शुरुआत की और वहीं से ये विश्व के अन्य देशों में पहुंची। गाजर चार अलग-अलग रंगों लाल,पीली, संतरी और काली रंग की पाई जाती है। साल 2003 में अंतर्राष्ट्रीय गाजर दिवस की स्थापित की गई। जिसके बाद साल 2012 तक यह दुनिया भर में उन सभी जगहों पर फैल गया है, जहां गाजर के बारे में लोग जानते थे। बता दें, सबसे पहले गाजर दिवस को मनाने की शुरुआत फ्रांस और स्वीडन से हुई। इसके बाद भारत, जापान, रूस इटली समेत दुनिया के कई देशों में विश्व गाजर दिवस मनाया जाने लगा। गाजर दिवस को मनाने का मकसद देश के लोगों के बीच गाजर जैसे पौष्टिक आहारों के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ाने का था।अंतर्राष्ट्रीय गाजर दिवस को मनाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप पोषक तत्वों से भरपूर इस सब्जी का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें। गाजर की खासियत यह है कि आप इसका इसका उपयोग ज्यादातर सब्जियों को बनाते समय कर सकते हैं। बात चाहे लंच में बनने वाली मिक्स वेज की हो या फिर डिनर के बाद सर्व किए जाने वाले हलवे की, गाजर का सेवन किसी भी रूप में किया जा सकता है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि अंतर्राष्ट्रीय गाज़र दिवस 4 अप्रैल 2025 – गाजर खाओ स्वस्थ बनाओ – कुदरत के कायदे,गाज़र के फायदे।गाज़र दिवस मनाने का मकसद पौष्टिक अहारों के प्रति लोगों में जनजागरण बढ़ाना है। वर्तमान जंक व चाइनीस फूड वाले युग में पोषक तत्वों से भरपूर नेचुरल व इम्युनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ व फलों का सेवन ज़रूरी है।
*-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र *