लुधियाना 27 फरवरी। लुधियाना नगर निगम में एसई और एक्सियन लेवल के अधिकारियों द्वारा अपने रिश्तेदारों को ही ठेकेदार रखने का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। नगर निगम के अधिकारी अंदरखाते इस मामले को लेकर चर्चा करते हुए नजर आ रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि इस मामले में अभी तक नगर निगम अधिकारियों द्वारा कोई एक्शन नहीं लिया गया है। चर्चा है कि शायद उच्च अधिकारियों की भी एसई व एक्सियन लेवल के अधिकारियों के साथ सेटिंग है, जिसके चलते मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं अब इस मामले में ठेकेदार अजय जिंदल द्वारा आवाज उठाते हुए अनोखी मांग रख दी गई है। उनकी और से मामले में डीएनए टेस्ट कराने की मांग की है। बकायदा इस संबंध में अजय जिंदल द्वारा नगर निगम को लिखित में पत्र भी दिया गया है। जिसमें उन्होंने एसई, एक्सियन और उनके रिश्तेदार ठेकेदारों का डीएनए कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि अभी भी निगम के उच्च अधिकारी मामले में चुपी साधे बैठे रहेगें या मामले की गंभीरता को समझते हुए कोई एक्शन भी लिया जाएगा।
तीन सदस्यीय कमेटी नहीं कर सकी मामला उजागर
जानकारी के अनुसार इस घोटाले की जांच के लिए तीन सदस्सीय कमेटी गठित की गई थी। जिसमें बीएंडआर के अधीक्षण इंजीनियर शाम लाल गुप्ता, रणजीत सिंह और कार्यकारिणी इंजीनियर बलविंदर सिंह को मेंबर बनाया गया था। यह कमेटी गठित किए भी 24 दिन बीत चुके हैं। लेकिन फिर भी कमेटी मामले को उजागर नहीं कर सकी। हालांकि इस नियम को तोड़ने पर प्रावधान है कि या तो अधिकारी नौकरी छोड़ेगा या ठेकेदार को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। अब कमेटी दोनों में से किस पक्ष में जाती है ये देखना होगा।
डीएनए से सच हो जाएगा साबित
दरअसल, इस घोटाले के उजागर होने के बाद मामले में शामिल एसई और एक्सियन द्वारा लगातार यह दावा किया जा रहा है कि उन्होंने अपने किसी रिश्तेदार को ठेकेदार नहीं रखा है। जिसके चलते ठेकेदार अजय जिंदल ने मांग की है कि उक्त एसई और एक्सियन का डीएनए टेस्ट कराया जाए। जिसके बाद जिन रिश्तेदार ठेकेदारों पर आरोप लगे हैं, उनका टेस्ट हो। दोनों टेस्ट से पता चल जाएगा कि वह रिश्तेदार है या नहीं। क्योंकि अब इस झूठ को साबित करने का यही कानूनी तरीका सही है।
रिश्तेदारों पर वार चुके हैं 100 करोड़ रुपए
चर्चा है कि उक्त एसई और एक्सियन की और से अपने रिश्तेदारों पर 100 करोड़ रुपए वार दिए गए हैं। जबकि यह पैसा उनकी और से अपनी जेब से नहीं बल्कि सरकारी खजाने से निकालकर वारा जा रहा है। चर्चा है कि अधिकारियों द्वारा सर्विस रूल्स को तोड़ते हुए अपने रिश्तेदारों को ही नगर निगम में ठेकेदार रख लिया। जिसके बाद उन्हें 100 करोड़ से अधिक के ठेके भी अलॉट कर डाले। अधिकारियों ने अपने 12-13 रिश्तेदारों को ठेकेदार बनाया है। जिसमें सबसे ज्यादा एसई के 7-8 रिश्तेदार हैं।