शर्मनाक-करतूत ! बेटे ने 77 साल की मां को गुजारा भत्ता देने के खिलाफ लगाई रिट

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जज ने मामला सुनते ही कहा, यह तो ‘कलयुग’ की निशानी, ठोक दिया बेटे पर 50 हजार जुर्माना

चंडीगढ़ 27 फरवरी। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले पर हैरानी जताई. एक शख्स ने अपनी 77 साल की मां को 5,000 रुपये भत्ता देने के फैसले को चुनौती दी थी. जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने उस आदमी पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही उसे तीन महीने के अंदर यह रकम अपनी मां के नाम पर संगरूर के प्रधान जज, फैमिली कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि ‘यह कलयुग का एक जीता-जागता उदाहरण है. इस केस ने कोर्ट को झकझोर कर रख दिया है. प्रधान जज, फैमिली कोर्ट द्वारा पारित आदेश में कोई गड़बड़ी नहीं है. यहां यह कहना उचित होगा कि 5,000 रुपये की रकम भी कम थी. हालांकि, वृद्धा ने इस राशि को बढ़ाने के लिए कोई अलग से याचिका दायर नहीं की थी.’

‘बार एंड बेंच’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक महिला के पति की मृत्यु 1992 में हो गई थी. उनके एक बेटा और एक विवाहित बेटी है. उनका एक और बेटा था, जिसकी भी मृत्यु हो चुकी है. उसके पीछे उसकी पत्नी और दो बेटे हैं. पति की मृत्यु के बाद, 77 वर्षीय महिला की 50 बीघा जमीन उनके बेटे और मृत बेटे के बेटों को मिली. 1993 में, उन्हें उनके अतीत, वर्तमान और भविष्य के भरण-पोषण के लिए 1 लाख रुपये की राशि भत्ता के रूप में दी गई थी. इसके बाद वह अपनी बेटी के साथ रहने लगीं. उनके बेटे ने उन्हें दिए जा रहे 5,000 रुपये के भत्ते को चुनौती दी. उसका तर्क था कि चूँकि वह उसके साथ नहीं रहती हैं, इसलिए फैमिली कोर्ट यह आदेश पारित नहीं कर सकता था.

हालांकि, मां का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने दलील दी कि उनके पास आय का कोई स्रोत नहीं है. उन्हें अपनी बेटी के सहारे जीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. उनके पास गुजारा करने का कोई और विकल्प नहीं है. कोर्ट ने इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला बताया. कोर्ट ने कहा कि एक बार यह पाया गया कि वृद्ध महिला के पास आय का कोई स्रोत नहीं है, तो उसके बेटे के पास याचिका दायर करने का कोई आधार नहीं था.

इस याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ‘यह वास्तव में इस अदालत की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला मामला है. ये याचिका कलयुग का निशानी है. बेटे ने अपनी ही मां के खिलाफ याचिका दायर करना सही समझा. वह 5,000 रुपये के भत्ते को चुनौती दे रहा है. जबकि वह अपने पिता की संपत्ति का उत्तराधिकारी बना है. उसकी 77 वर्षीय मां के पास आय का कोई स्रोत नहीं है. उन्हें अपनी बेटी के साथ रहना पड़ रहा है, जो विवाहित है और अपनी ससुराल में रहती है।

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