चंडीगढ़, 29 अगस्त 2025:
पंजाब को एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाने और व्यापार को सुगम बनाने के उद्देश्य से, पंजाब के कैबिनेट मंत्री श्री संजीव अरोड़ा ने आज बताया कि वर्धमान स्पेशल स्टील्स लिमिटेड (वीएसएसएल), जापान की आइची स्टील कॉर्पोरेशन (एएससी) के साथ संयुक्त उद्यम में, पंजाब के लुधियाना जिले में एक नया ग्रीनफील्ड स्पेशल एंड अलॉय स्टील प्लांट स्थापित कर रहा है। यह परियोजना राज्य में एक टिकाऊ, तकनीकी रूप से उन्नत और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्टील निर्माण सुविधा स्थापित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इस परियोजना के बारे में मीडिया से बात करते हुए, संजीव अरोड़ा ने कहा कि इस परियोजना का कुल निवेश ₹2500 करोड़ है। इस संदर्भ में, मिश्र धातु और विशेष इस्पात की 5 लाख टन प्रति वर्ष (टीपीए) की स्थापित क्षमता एक संयंत्र क्षमता है और इस्पात निर्माण घरेलू और वैश्विक दोनों ऑटोमोटिव आवश्यकताओं को पूरा करेगा। इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) के माध्यम से उत्पादन ऊर्जा दक्षता, कम कार्बन उत्सर्जन और स्वच्छ इस्पात उत्पादन सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने आगे बताया कि 500 करोड़ रुपये की पूंजीगत लागत से एक सौर ऊर्जा संयंत्र भी स्थापित किया जाएगा। यह संयंत्र हमारे सहयोगी साझेदार के सहयोग से स्थापित किया जा रहा है ताकि संयंत्र संचालन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने आगे बताया कि ₹500 करोड़ का यह निवेश, ग्रीनफील्ड संयंत्र की अनुमानित ₹2000 करोड़ की लागत के अतिरिक्त है।
गौरतलब है कि इस परियोजना से पंजाब में रोज़गार सृजन में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे 1500 से ज़्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार मिलेगा, साथ ही पूरे पंजाब में एमएसएमई, आपूर्तिकर्ताओं और सेवा प्रदाताओं के लिए अप्रत्यक्ष रोज़गार और व्यावसायिक अवसर भी बढ़ेंगे।
संजीव अरोड़ा का मानना है कि यह परियोजना पंजाब के औद्योगिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी और उन्नत एवं टिकाऊ इस्पात निर्माण में राज्य की अग्रणी स्थिति को और मज़बूत करेगी। वह इस पहल को पंजाब की अर्थव्यवस्था और उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक सफलता बनाने के लिए उद्यमियों के सहयोग और मार्गदर्शन की भी अपेक्षा करते हैं।
वीएसएसएल के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सचित जैन ने अधिक जानकारी देते हुए कहा कि ऊर्जा कुशल तकनीकों और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग द्वारा स्टील स्क्रैप को पिघलाकर हरित इस्पात उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो वैश्विक स्थिरता प्रथाओं और भारत के नेट-ज़ीरो विज़न के अनुरूप है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन न्यूनतम होगा।
सचित जैन ने कहा कि यह एक संयुक्त उद्यम और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण परियोजना है। यह संयंत्र ऑटोमोटिव अनुप्रयोगों के लिए विशेष इस्पात के क्षेत्र में विश्व अग्रणी, जापान की आइची स्टील कॉर्पोरेशन के सहयोग से स्थापित किया जाएगा। एएससी निरंतर सहयोग और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा जिससे विश्वस्तरीय स्वच्छ इस्पात के उत्पादन में मदद मिलेगी। यह संयंत्र टोयोटा के अनुरूप विकसित किया जाएगा, जिससे परिचालन उत्कृष्टता, सुरक्षा, दक्षता और विश्वस्तरीय संयंत्र लेआउट सुनिश्चित होगा।
उन्होंने आगे बताया कि इस परियोजना में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस परियोजना में नवीनतम ऊर्जा-कुशल और उत्पादक तकनीकों को शामिल किया जाएगा ताकि प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाया जा सके और साथ ही पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सके। यह सुविधा कड़े वैश्विक ओईएम मानकों को पूरा करने के लिए सुसज्जित होगी, जिससे पंजाब विशेष इस्पात निर्यात के केंद्र के रूप में स्थापित होगा और निर्यात प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होगी।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि यह परियोजना सहायक उद्योगों, फोर्जिंग इकाइयों, लॉजिस्टिक्स, सेवा क्षेत्रों में एक मजबूत गुणक प्रभाव पैदा करेगी और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उद्योग एवं वाणिज्य सचिव कमल किशोर यादव भी उपस्थित थे।