हिसार, यमुनानगर और करनाल में दो-दो बार दे डाला था कन्यादान योजना और श्रमिकों की मौत का मुआवजा
चंडीगढ़, 29 अगस्त। नियंत्रक महालेखा परीक्षक यानि कैग की जांच से हरियाणा की बीजेपी सरकार में खलबली मची है। दरअसल इस रिपोर्ट में श्रम विभाग के हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
जानकारी के मुताबिक बोर्ड के आयकर रिटर्न का समय पर आवेदन नहीं करने से 713.25 करोड़ रुपये टैक्स देना पड़ा।
महिलाओं के लिए सिलाई मशीन योजना के तहत खरीदी गईं 43,205 मशीनों में से 1,257 मशीनें अब तक वितरित नहीं हुईं। इससे 27.64 लाख का नुकसान हो गया। कैग रिपोर्ट में सरकारी संस्थानों की लापरवाही के चलते सरकार को करोड़ों रुपये के नुकसान का खुलासा किया गया। वहीं, हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम ने सोहना के औद्योगिक मॉडल टाउनशिप में लिथियम आयन बैटरी प्लांट के लिए 179 एकड़ का प्लॉट आवंटित किया। जुलाई, 2020 में जारी आवंटन पत्र में 58.71 करोड़ रुपये का मुआवजा शामिल नहीं किया गया। इससे 9.76 करोड़ रुपये का कम चार्ज हुआ। निगम के आयकर रिटर्न समय पर दाखिल ना करने से 5.06 करोड़ रुपये का ब्याज भी देना पड़ा।
जबकि 2 अगस्त, 2022 को गुरुग्राम में चार श्रमिकों की मौत की वजह जांच में ठेकेदार की लापरवाही मिली। प्रदेश के छह जिलों में विभिन्न योजनाओं के तहत 5.34 करोड़ रुपये के 1,267 लाभों में से 2.20 करोड़ के 577 लाभ (45.54 प्रतिशत) अपात्रों को बांट दिए गए। अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच तक नहीं की। इसी तरह गुरुग्राम में एक लाभार्थी ने मृत्यु प्रमाण-पत्र के आधार पर 2.15 लाख का लाभ प्राप्त किया। हिसार, फरीदाबाद और करनाल में तीन आवेदकों ने पुत्रियों के विवाह के लिए कन्यादान योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने को आवेदन किया था, जिन्हें अस्वीकृत कर दिया गया था। बाद में इन तीनों का आवेदन स्वीकार कर इन्हें दो बार 1.53 लाख का गलत लाभ दिया गया।
इसी तरह हिसार, यमुनानगर जिलों में दो मृत निर्माण श्रमिकों की ओर से आवेदन करने वालों को दो बार गलत लाभ जारी किया गया। करनाल के कुटैल गांव में कल्पना चावला मेडिकल यूनिवर्सिटी की चाहरदीवारी के लिए मई 2016 में 5.73 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी। बाद में ईंट की दीवार को उपयुक्त ना मानकर आरसीसी चाहरदीवारी बनाने का फैसला लिया गया और इसके भुगतान में भी घपला हो गया।
अंबाला कैंट में स्टेडियम अपग्रेडेशन परियोजना में भी ऐसी ही करोड़ों की गड़बबड़ी हुई। गुरुग्राम और फरीदाबाद में भूमि अधिग्रहण मुआवजे में देरी से 83.04 करोड़ रुपये ब्याज का भुगतान हुआ। साथ ही संपदा प्रबंधन में गड़बड़ी से 9.76 करोड़ और गलत टैरिफ वसूली से 32.67 करोड़ का नुकसान हुआ। कैग ने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि हरियाणा में 2019 से 2022 के बीच हरियाणा में किए गए सार्वजनिक कार्यों की लागत में भारी इजाफा हुआ है।