आंदोलित मुलाजिमों की यूनियन का इलजाम, विभाग जान-बूझकर दिखा रहा घाटा
कुरुक्षेत्र, 3 अप्रैल। यहां रोडवेज के निजीकरण का मुद्दा गर्माने लगा है। विभागीय कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए वीरवार को रोडवेज कर्मी ने अगले 24 घंटे के लिए भूख हड़ताल शुरु कर दी। हालांकि कर्मियों ने कामकाज बंद नहीं करने का ऐलान किया है।
जानकारी के मुताबिक वीरवार से 6 मई तक रोडवेज कर्मी निजीकरण के विरोध में अलग-अलग जिलों में हड़ताल पर रहेंगे। वे रात को भी धरनास्थल पर ही रहेंगे। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के डिपो प्रधान नरेंद्र पांचाल के मुताबिक सरकार रोडवेज को निजी हाथों में सौंपने की साजिश रच रही है। 2018 में 710 किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसें चलाई गईं थी। जिनकी औसत आय 10-11 रुपए प्रति किलोमीटर है, लेकिन उन्हें 32-33 रुपए प्रति किलोमीटर भुगतान किया जा रहा है। इससे विभाग को भारी नुकसान हो रहा है।
यूनियन के सचिव रंजीत के मुताबिक परिवहन मंत्री अनिल विज से कर्मचारियों को उम्मीद थी कि वे रोडवेज को घाटे से उबारेंगे, लेकिन इसके उलट सरकार ने प्राइवेट बसों को बढ़ावा देने का काम किया। हाल ही में 62 रुपए प्रति किलोमीटर किराए की इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई गई, जो घाटे का सौदा है। वहीं, निजी बसों के परमिट ऑनलाइन जारी किए गए। वर्कशॉप में मैकेनिकों की कोई भर्ती नहीं हुई। इस कारण सांझा मोर्चा 3 अप्रैल से 6 मई तक अलग-अलग डिपो में, 12-13 मई को सभी डिपो में भूख हड़ताल और 8 जून को परिवहन मंत्री के आवास अंबाला में न्याय मार्च करेगा। अगर उनकी मांगे नहीं मानी तो 6 जून को परिवहन मंत्री अनिल विज के आवास का घेराव करेंगे।