पूर्व उप-राष्ट्रपति धनखड़ चाहते हैं, उनकी रोकी विधायक पेंशन बहाल हो

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पूर्व उप-राष्ट्रपति, सांसद और विधायक बतौर उन्हें 2 लाख, 45,000 व 42,000 रुपये पेंशन मिल सकती है

चंडीगढ़, 31 अगस्त। पूर्व उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विधानसभा के पूर्व सदस्य के रूप में पेंशन के लिए आवेदन किया है। राजस्थान विधानसभा सचिवालय ने कहा कि उनका आवेदन स्वीकार कर लिया गया है और पेंशन जल्द शुरू हो जाएगी।

धनखड़ 1993 से 1998 तक राजस्थान के किशनगढ़ से कांग्रेसी विधायक थे। उन्हें जुलाई 2019 तक विधायक पेंशन मिली, जब वह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बने तो यह लाभ बंद हो गया। फिर इसी साल 21 जुलाई को उप-राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद धनखड़ ने अब अपनी विधायक पेंशन बहाल करने के लिए राजस्थान विस सचिवालय से संपर्क किया। अधिकारियों के अनुसार उनकी पेंशन बहाली की प्रक्रिया जारी है और यह लाभ उप-राष्ट्रपति पद से उनके इस्तीफे की तारीख से देय होगा।

राजस्थान में पूर्व विधायक को एक कार्यकाल के लिए 35,000 रुपये पेंशन मिलती है। 70 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिएए 20 प्रतिशत की वृद्धि का अधिकार है। 74 वर्ष की आयु में, धनखड़ इस श्रेणी के तहत 42,000 रुपये प्रति माह के हकदार हैं। वह कई पेंशनों के पात्र हैं। एक कार्यकाल के लोकसभा सांसद के रूप में उन्हें 45,000 रुपये प्रति माह मिलते हैं। पूर्व उप-राष्ट्रपति बतौर उन्हें आधिकारिक आवास, कर्मचारियों और चिकित्सा सुविधाओं के अलावा लगभग 2 लाख रुपये मासिक मिलते हैं। हालांकि, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के कार्यकाल के लिए उन्हें कोई पेंशन नहीं मिलती है। हालांकि वे सचिवीय सहायता के लिए 25,000 रुपये की प्रतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं।

यहां बता दें कि पिछले महीने उप-राष्ट्रपति पद से धनखड़ के अचानक इस्तीफे से राजनीतिक अटकलें अब भी जारी हैं। उन्होंने मानसून सत्र के पहले दिन स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ दिया, जिसे कांग्रेस ने पूरी तरह से अप्रत्याशित बताया था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया था कि इसके पीछे स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से कहीं ज़्यादा गंभीर कारण थे। उन्होंने 21 जुलाई को हुए एक असामान्य घटनाक्रम की ओर इशारा किया, जब धनखड़ ने दोपहर 12.30 बजे कार्य मंत्रणा समिति की बैठक की अध्यक्षता की। जिसमें भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजु भी शामिल थे। शाम 4.30 बजे एक और बैठक निर्धारित थी, लेकिन दोनों नेता इसमें शामिल नहीं हुए। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी संदेह व्यक्त कर कहा था, वह एक स्वस्थ व्यक्ति हैं। मुझे लगता है कि उनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस साल की शुरुआत में जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास से नकदी बरामद होने के बाद उन्हें हटाने के विपक्ष समर्थित कदम पर मतभेदों को भी उनके इस्तीफे से जोड़ा जा रहा है।

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