चंडीगढ़/नई दिल्ली, 29 अगस्त
पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों को तर्कसंगत बनाने के मौजूदा प्रस्ताव के तहत राज्यों को वित्तीय अस्थिरता रोकने के लिए पर्याप्त मुआवज़ा देना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस उपाय का लाभ कॉर्पोरेट घरानों के बजाय, महंगाई की मार झेल रहे देश के गरीब लोगों तक पहुँचना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि मूल्य युक्तिकरण के वर्तमान प्रस्ताव को राजस्व हानि की भरपाई के लिए मुआवजे के प्रावधान के बिना लागू किया जाता है, तो इससे राज्यों में वित्तीय अस्थिरता पैदा होगी और देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचेगा, जो अस्वीकार्य है।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री श्री चीमा ने कर्नाटक भवन में कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, केरल और तेलंगाना सहित राज्यों के वित्त मंत्रियों और प्रतिनिधियों के साथ ‘जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने पर परामर्श’ पर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया। उन्होंने कहा कि राज्यों की यह सुविचारित सिफारिश है कि दरों को तर्कसंगत बनाने के साथ-साथ एक मज़बूत राजस्व संरक्षण ढाँचा भी होना चाहिए। केवल ऐसा संतुलित दृष्टिकोण ही राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता की रक्षा करेगा और साथ ही सहकारी संघवाद की सच्ची भावना के साथ जीएसटी सुधार के उद्देश्यों को आगे बढ़ाएगा।
पंजाब के वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी जुलाई 2017 में लागू किया गया था और राजस्व तटस्थता का सिद्धांत इसके डिजाइन का केंद्र था, लेकिन इसके लागू होने के बाद, राज्यों को भारी राजस्व घाटा उठाना पड़ा है। श्री चीमा ने कहा कि इसके लागू होने के बाद, पंजाब को लगभग 1.11 लाख करोड़ का वित्तीय घाटा उठाना पड़ा है, हालांकि मुआवजा उपकर सक्रिय होने पर राज्य को 60000 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, लेकिन आज तक पंजाब को शेष 50000 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है।
मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि इन सभी राज्यों ने कराधान के वर्तमान प्रभावी स्तर को बनाए रखने के लिए पाप और विलासिता की वस्तुओं पर अतिरिक्त कर लगाने की व्यवस्था की पुरज़ोर माँग की है। यह राशि पूरी तरह से राज्यों को हस्तांतरित की जानी चाहिए ताकि बढ़ते राजकोषीय तनाव और राजकोषीय स्वायत्तता के ह्रास की भरपाई की जा सके।
“राजस्व स्थिरीकरण के बिना राज्य सामाजिक कल्याण के अपने संवैधानिक कर्तव्य को कैसे निभा सकते हैं। केंद्र को राज्यों के कंधों पर बोझ डालने और राजस्व को अपने पास रखने के सिद्धांत की ओर झुकाव नहीं करना चाहिए। यदि राज्य वित्तीय रूप से मजबूत होंगे तभी वे देश को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, इसलिए सभी राज्यों के राजस्व हितों की रक्षा की जानी चाहिए और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मजबूत तंत्र बनाया जाना चाहिए।” श्री चीमा ने आगे कहा कि ये राज्य इस मुद्दे पर अन्य सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
बाढ़ की स्थिति पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए पंजाब के वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को इस आपदा में पंजाब की मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार मौजूदा कठिन समय में राज्य के लोगों की मदद के लिए पूरी ईमानदारी से काम कर रही है और नुकसान का उचित आकलन करने के बाद केंद्र से विशेष पैकेज की मांग की जाएगी।