बांग्लादेश के दोहरे-रवैये पर क्या भारत को करना चाहिए भरोसा ?
भारत और बांग्लादेश में तनाव के बीच पीएम नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रो. मोहम्मद यूनुस की पहली मुलाक़ात हुई। जिसमें हिंदुओं की सुरक्षा और शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दा हावी रहे।
दरअसल थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में बिम्स्टेक यानि बे ऑफ़ बंगाल इनिशिएटिव फ़ॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन के छठे शिखर सम्मेलन से अलग मोदी-यूनुस की मुलाक़ात हुई। इस मुलाक़ात से दिखा कि दोनों नेता संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश में हैं, भविष्य में वार्ता के दरवाज़े खुले रखना चाहते हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा व स्थिरता को लेकर सहयोगी-रचनात्मक रिश्ते आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस ने पीएम मोदी को दस साल पुरानी मुलाक़ात की तस्वीर भी भेंट की। बीते एक दशक में दोनों नेताओं की यह पहली आधिकारिक मुलाक़ात है। इस द्विपक्षीय वार्ता में बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार मो. तौहीद हुसैन, मुख्य सलाहकार के प्रतिनिधि डॉ. खलीलुर रहमान, भारतीय विदेश मंत्री एस.जयशंकर और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल शामिल थे।
भारत-बांग्लादेश के बीच कुछ समय से हालात तनावपूर्ण बने हैं। पाकिस्तान और चीन से बांग्लादेश की बढ़ती क़रीबी भी दोनों देशों के संबंध जटिल बना रही है। ऐसे में दोनों शीर्ष नेताओं की मुलाक़ात अहम मानी जा रही है। प्रो. यूनुस ने अपने एक्स हैंडल पर द्विपक्षीय वार्ता की तस्वीरों के साथ मुलाक़ात की जानकारी साझा की। उन्होंने इसके लिखा, यह तस्वीर 3 जनवरी 2015 को 102वें इंडियन साइंस कांग्रेस के की है, जब पीएम मोदी ने उन्हें गोल्ड मैडल दिया था। वहीं, मोदी ने बिम्सटेक की अध्यक्षता संभालने पर बांग्लादेश को बधाई दी आपसी सहयोग की उम्मीद जताई। नई दिल्ली से जारी बयान के मुताबिक, दोनों नेता बिम्सटेक के ढांचे के तहत सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए। मुलाक़ात की तस्वीरें एक्स पर साझा करते पीएम मोदी ने लिखा, बांग्लादेश के साथ रचनात्मक रिश्ते बनाने को भारत प्रतिबद्ध है। इस मुलाक़ात के बारे में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि बातचीत में प्रधानमंत्री ने माहौल बिगाड़ने वाली बयानबाजी से बचने का आग्रह किया। इस मुलाक़ात के बारे में ढाका से जारी बयान के अनुसार, प्रोफ़ेसर यूनुस ने पीएम मोदी से बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की हालत पर पीएम मोदी की चिंता पर प्रोफ़ेसर यूनुस ने कहा कि अल्पसंख्यकों पर हमलों की रिपोर्ट्स बढ़ा-चढ़ाकर बताई गईं।
वहीं, भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने ढाका के बयान को अड़ियल बताते कहा कि मोदी के साथ मीटिंग पर बांग्लादेश ने जो बयान जारी किया, बहुत दूरदर्शी नहीं है। यूनुस अंतरिम सलाहकार हैं, फिर भी पीएम मोदी ने उनसे आधिकारिक मीटिंग कर एक बड़ा राजनीतिक संकेत दिया। हाल ही में चीन के दौरे पर गए यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का हवाला देते हुए चीन से अपनी अर्थव्यवस्था को विस्तार देने की अपील की थी। उन्होंने पूर्वोत्तर के सातों राज्यों को लैंडलॉक्ड क्षेत्र बताया। साथ ही बांग्लादेश को इस इलाक़े में समंदर का एकमात्र संरक्षक बताते हुए चीन से अपने यहां आर्थिक गतिविधि बढ़ाने की अपील की थी। उनके इस बयान की भारत में तीखी आलोचना हुई थी। बिम्सटेक का सचिवालय बांग्लादेश में है और यूनुस से बातचीत में इसका भी ध्यान रखा गया होगा। बांग्लादेश के हित बेहतर तरीक़े से तभी पूरे होंगे, जब वह नेबरहुड फ़र्स्ट पॉलिसी पर खुद भरोसा करे और उसका पालन करे।
रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी के मुताबिक पीएम मोदी, कूटनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने में अपने व्यक्तिगत प्रभाव और सहज तालमेल स्थापित करने की अपनी क्षमता का इस्तेमाल करने में भरोसा करते हैं। घरेलू स्तर पर यूनुस के भारत विरोधी भावना को भड़काने की कोशिशें भी मोदी को उनसे मिलने से रोक नहीं पाईं। अंतर्राष्ट्रीय मामलों पर नज़र रखने वाले पत्रकार शशांक मट्टू के मुताबिक भारत के पूर्वोत्तर पर यूनुस की टिप्पणी पर विवाद के कई दिनों बाद, पीएम मोदी ने उनसे ऐसी बयानबाज़ी करने से बचने को कहा, जिससे भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पर असर पड़ता हो।
बांग्लादेश में उच्चायुक्त रह चुकीं वीना सीकरी ने कहा, मुझे लगता है कि यह एक अच्छी और खुले मन से मुलाक़ात थी।प्रधानमंत्री ने हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर हमलों से जुड़े हालात के बारे में विस्तार से चर्चा की और कहा कि दोषियों पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह भारत और दुनिया के लिए भी स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग और दुनिया भर की तमाम एजेंसियों और संगठनों की इस पर नज़र है। बांग्लादेश में जनउभार के चलते पिछले साल पांच अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना सरकार गिर गई थी, उसके बाद से ही दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखा जा रहा है। भारत की मौजूदा सरकार से क़रीब रहीं शेख़ हसीना ने भारत में शरण ले रखी है। अंतरिम सरकार बनने के बाद से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं और इस मुद्दे को भारत सरकार लगातार उठाती रही है।
दूसरी ओर पाकिस्तान और चीन से बांग्लादेश की बढ़ती नज़दीकी से भी भारत असहज है। बीते मार्च में प्रोफ़ेसर यूनुस चीन के द्विपक्षीय दौरे पर गए थे और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा हुई। इस यात्रा में उन्होंने चीनी कंपनियों को तीस्ता प्रोजेक्ट में शामिल होने का न्योता दिया। जबकि तीस्ता नदी के जल बंटवारे का मुद्दा भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। यही नहीं, चीन की अपनी यात्रा के दौरान बीजिंग में हुए एक कार्यक्रम में प्रोफ़ेसर यूनुस ने यह कहकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया कि भारत के पूर्वोत्तर के सात राज्यों के लिए समंदर का एकमात्र गेटवे बांग्लादेश है। इसका ज़िक्र करते हुए उन्होंने चीनी कंपनियों से बांग्लादेश में आर्थिक गतिविधि बढ़ाने की अपील की। भारत में इस बयान को चीन के प्रभाव को बढ़ाने के लिए आमंत्रण दिए जाने के रूप में लिया गया।
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