मुद्दे की बात : भारत पर 26% टैरिफ़ लगा बोले ट्रंप ‘मोदी मेरे दोस्त’

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इसे भारत पर तंज मान रहे माहिर, अमेरिका ने टैरिफ लागू कर सभी देशों को ‘धमकाया’ भी !

आखिरकार वही हुआ, जिसकी आशंका कई माहिर जता रहे थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ़ की घोषणा कर दी है। ट्रंप के इस टैरिफ़ को ‘डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ़’ का नाम दिया गया है। दुनियाभर के मुल्कों के साथ ही मीडिया की निगाह इसी अहम ऐलान पर थी।

गौरतलब है कि व्हाइट हाउस ने लगभग 100 देशों की सूची जारी की है, जिन पर ‘डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ़’ लगाया गया। बीबीसी समेत तमाम नामी मीडिया हाउस फिलहाल ‘ट्रंप के टैरिफ’ का ‘फाइनेंशियल-पोस्टमार्टम’ करने में जुटे हैं। जिन देशों पर टैरिफ़ लगाया गया है, यह अमेरिका पर उन देशों के लगाए टैरिफ़ से आधा या लगभग आधे के बराबर है। हालांकि, इस सूची में ऐसे देश भी हैं, जिन पर उतना ही टैरिफ़ लगाया गया है, जितना उन्होंने अमेरिका पर लगाया है। इसके अलावा 10 फ़ीसदी का बेसलाइन टैरिफ़ भी लगाया गया है। टैरिफ़ की घोषणा करते ट्रंप ने कहा कि आज लिबरेशन डे है, जिसका अमेरिका लंबे समय से इंतज़ार कर रहा था। यह दिन अमेरिकी उद्योग के पुनर्जन्म व फिर से समृद्ध बनने के तौर पर याद किया जाएगा। पहले अमेरिका का फ़ायदा उठाया गया और उसे विदेशियों ने ‘लूट’ लिया। उन्होंने कहा कि हमारे टैक्स पेयर्स को 50 सालों से से ठगा, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। ट्रंप ने यह टैरिफ़ एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए लागू किया। इस ‘डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ़’ को इस तरह समझ सकते हैं। मसलन, ट्रंप ने भारत पर 26 फ़ीसदी ‘डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ़’ की घोषणा की। व्हाइट हाउस के मुताबिक़, भारत अमेरिका पर 52 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाता है। टैरिफ़ घोषणा करते ट्रंप ने बाकायदा भारत का भी ज़िक्र करते कहा कि प्रधानमंत्री मोदी कुछ ही दिन पहले ही यहां से गए, जो मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। हालांकि मैंने उनसे कहा कि आप मेरे दोस्त हैं, लेकिन आप हमारे साथ सही नहीं कर रहे। वह हमें 52 फ़ीसदी चार्ज कर रहे हैं, आप समझ रहे हैं, इस लिहाज़ से हम उनसे लगभग ना के बराबर चार्ज कर रहे हैं, सालों और दशकों से।

अब अहम सवाल, कब से लागू होगा टैरिफ़ ? दरअसल विदेशों में निर्मित सभी ऑटोमोबाइल्स पर 25 फीसदी का टैरिफ़ लगाया गया है। जो अमेरिकी समयानुसार बुधवार-गुरुवार की रात से लागू हो गया। इसके अलावा, सभी देशों पर 10 फ़ीसदी का बेसलाइन टैरिफ़ अमेरिकी समयानुसार पांच अप्रैल रात 12 बजकर एक मिनट से लागू होगा। जबकि 10 फ़ीसदी से अधिक टैरिफ़ अमेरिकी समयानुसार 9 अप्रैल रात 12 बजकर एक मिनट से लागू होगा। ट्रंप के टैरिफ़ से दुनिया भर में आर्थिक उथल-पुथल की आशंका है। इसकी घोषणा के बाद एशिया-पैसिफ़िक देशों के शेयर बाज़ारों में गिरावट देखने को मिली। जापान के शेयर बाज़ार में चार फ़ीसदी तो ऑस्ट्रेलिया के शेयर बाज़ार में दो फ़ीसदी की गिरावट आई। उधर, ट्रंप के टैरिफ़ का असर सोने की कीमत पर भी देखने को मिला, उसकी कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई। ट्रंप के भाषण से पहले व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप सभी देशों पर 10 फ़ीसदी का बेसलाइन टैरिफ़ लगाएंगे। उन्होंने कुछ देशों मात्र बेसलाइन टैरिफ लगाया, जबकि कुछ देशों पर इससे ज़्यादा टैरिफ़ लगाया गया है।

बेसलाइन टैरिफ़ का सामना करने वाले देशों में ब्रिटेन, सिंगापुर, ब्राज़ील, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, तुर्की, कोलंबिया, अर्जेंटीना, अल सेल्वाडोर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब शामिल है। जबकि सबसे ज़्यादा लगभग 60 देशों पर स्पेसिफ़िक रेसिप्रोकल टैरिफ़ लगाया गया। इस सूची में शामिल देशों में क्रमवार यूरोपीय संघ (20%), चीन (34%), वियतनाम (46%), थाईलैंड (36%), जापान (24%), कंबोडिया (49%), दक्षिण अफ़्रीका (30%) और ताइवान (32%) हैं। कनाडा और मेक्सिको को राहत देते हुए व्हाइट हाउस ने कहा कि वे इन दोनों देशों के साथ पिछले आदेशों में निर्धारित किए ढांचे के तहत ही काम करेंगे। कनाडा और मेक्सिको पर फेंटानिल और सरहद से जुड़े मुद्दों को वजह बताते हुए शुल्क लगाया गया था। ट्रंप ने तब दोनों देशों पर 25% टैरिफ़ का ऐलान किया था, लेकिन बाद में इसे कम किया था। ट्रंप कनाडा और मेक्सिको पर शुल्क रोकने के लिए सहमत हुए। इसके अलावा, ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका विदेशों में निर्मित गाड़ियों पर 25% शुल्क लगा रहा है। यह शुल्क लगभग तुरंत, तीन अप्रैल की आधी रात को लागू हो जाएंगे।

ट्रंप की इस घोषणा का सबसे बड़ा असर अमेरिकी कारों पर ही पड़ने वाला है। अमेरिका बड़ी संख्या में कारें आयात करता है और अब उनकी क़ीमत बढ़ जाएगी। अमेरिका में अब बीयर, व्हिस्की और टक़िला जैसे ड्रिंक्स भी महंगे हो जाएंगे। मैक्सिको से आने वाली मोडेलो और कोरोना जैसे बीयर के ब्रैंड अब अमेरिका में महंगे हो जाएंगे। टैरिफ़ लगने के बाद एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में कई कारें 4,000 से 10,000 डॉलर तक महंगी हो जाएंगी। ट्रंप ने यूरोपीय संघ से आने वाली शराब पर भी 200 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया है, लिहाजा शैंपेन या जर्मन बीयर वगैहरा महंगे जाएंगे। इसके अलावा ईंधन, मेपस सिरप, एवोकाडो आदि भी अब अमेरिका में महंगे बिकेंगे। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी टैरिफ़ को ‘गलत’ बताते कहा है कि इससे व्यापार-युद्ध छिड़ सकता है। उन्होंने कहा कि हम अमेरिका से समझौता करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। इसका उद्देश्य उस व्यापार युद्ध को रोकना है, जो पश्चिमी देशों को कमजोर करेगा।

इस बीच ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि टैरिफ ‘अप्रत्याशित नहीं’ हैं, लेकिन वे ‘पूरी तरह से अनुचित’ हैं। इसकी घोषणा का कोई तर्क नहीं है.। यह ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच साझेदारी के ख़िलाफ़ है, यह किसी दोस्त का काम नहीं है। इस विरोध के बावजूद अमेरिका ट्रेज़री सैक्रेटरी स्कॉट वेसेंट ने चेतावनी दी है कि टैरिफ़ के जवाब में कोई देश अमेरिका पर शुल्क की घोषणा ना करे। सारे देशों को मेरी सलाह है कि वो पलटवार ना करें, आराम से बैठें। देखते हैं आगे क्या होता है, लेकिन अगर आपने पलटवार किया तो ये बात बढ़ जाएगी।

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