चंडीगढ/यूटर्न/22 अगस्त: राजनीति में सत्ता के शिखर पर पहुंचने वाले राजनेताओं की देश में कमी नहीं है। मगर आज हम आपको एक ऐसे नेता की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिन्हें सियासत बेशक विरासत में मिली थी। मगर उन्होंने अपने दम पर पूरी बीजेपी को टक्कर दे दी। 2019 में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में बीजेपी ने अबकी बार 75 पार का नारा दिया लेकिन कांग्रेस के एक अकेले नेता ने बीजेपी को 40 से भी कम सीटों पर समेट दिया। जी हां, हम बात कर रहे हैं हरियाणा के पूर्व मुखयमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की। भूपेंद्र हुड्डा को कोई प्रधान जी कहता है, तो कोई भूमिपुत्र। उनका एक नाम गंगापुत्र भी है। बाढ़ के पानी में बह गए भूपेंद्र सिंह हुड्डा जिंदा बचे तो लोगों ने उन्हें गंगापुत्र का नाम दे दिया। राजीव गांधी के कहने पर राजनीति में एंट्री करने वाले भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 3 बार पूर्व उपप्रधानमंत्री एक नहीं बल्कि तीन बार हराया। पेश से वकील रहे भूपेंद्र हुड्डा 4 बार हरियाणा की रोहतक सीट से सांसद रहे और 2005-2014 तक हरियाणा के मुखयमंत्री रहे। हरियाणा में ओलंपिक का क्रेज बढ़ाने का श्रेय भी भूपेंद्र हुड्डा को जाता है।
जब ताऊ देवीलाल ने गवर्नर को जड़ दिया था थप्पड़,
हरियाणा की 90 सीटों पर चुनाव के लिए एक अक्टूबर को वोटिंग होगी। वहीं, 4 अक्टूबर को नतीजों का ऐलान किया जाएगा। इसी बीच एक राजनीतिक किस्सा आपको बता रहे हैं। जो हरियाणा में ताऊ के रूप में मशहूर रहे दिग्गज नेता चौधरी देवीलाल से जुड़ा है। 1982 की बात है, जब उन्होंने हरियाणा के तत्कालीन गवर्नर गणपतराव देवजी तापसे को थप्पड़ जड़ दिया था। उस समय हरियाणा में चुनाव संपन्न हुए थे। लेकिन किसी भी दल को स्पष्ट तौर पर जनादेश नहीं मिला था। ताऊ की पार्टी भारतीय राष्ट्रीय लोकदल और बीजेपी गठबंधन ने मिलकर 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। जिसने अकेले 36 सीटों पर जीत दर्ज की थी। लेकिन बहुमत के लिए 46 सीटों की जरूरत थी। 22 मई 1982 को तापसे ने चौधरी देवीलाल को सरकार बनाने का न्योता दिया था। लेकिन इसी बीच भजनलाल ने कांग्रेस और निर्दलियों को एकजुट कर 52 विधायकों की लिस्ट राज्यपाल को थमा दी। इस पर राज्यपाल ने उनको सरकार बनाने का मौका दे दिया।
महाराष्ट्र के बड़े नेता थे तापसे
भजनलाल ने बिना देर किए तुरंत हरियाणा के मुखयमंत्री पद की शपथ ले ली। राज्यपाल के फैसले से देवीलाल इतना गुस्सा हो गए कि उन्होंने राजभवन का रुख किया। आते ही उनका राज्यपाल से विवाद हो गया। जिसके बाद देवीलाल ने उनकी ठुड्डी पकड़ ली। लोग सन्न रह गए और देखते ही देखते देवीलाल ने तापसे को थप्पड़ जड़ दिया था। राज्यपाल को सुरक्षा गार्ड मौके से ले गए थे। इस थप्पड़ की गूंज भारतीय राजनीति में लंबे समय तक देखने को मिली थी। देवीलाल ने अपने विधायकों को दिल्ली के होटल में शिफट किया था। बताया जाता है कि वहां से विधायक निकल गए थे। तापसे को महाराष्ट्र का मंझा नेता माना जाता था। उन्होंने इस घटना को तूल नहीं दिया। आखिर राजनीति में मंझे हुए खिलाड़ी देवीलाल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
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