75वें श्री हरिनाम संकीर्तन महोत्सव के 21वें दिवस पर भक्ति एवं प्रवचनों की दिव्य वर्षा

Rivanshi
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श्री दंडी स्वामी महाराज जी के शुभ आशीर्वाद से सिद्धपीठ श्री दंडी स्वामी ट्रस्ट, सेवा परिकर और श्री राधा गोविंद संकीर्तन मंडल (सेवक सिद्धपीठ) द्वारा आयोजित 75वां श्री हरिनाम संकीर्तन तथा गौलोकवासी पंडित जगदीश चंद्र कोमल जी महाराज के 25वें वरदान दिवस के पावन अवसर पर चल रहे 38 दिवसीय महासंकीर्तन का इक्कीसवाँ दिन अत्यंत दिव्य एवं भावपूर्ण रहा।कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित राज कुमार शर्मा ने की।

आज के दिवस पर दैवज्ञ महर्षि आचार्य निशांत जी (अंबाला छावनी) और श्री दिव्य दास जी (हिसार) ने अपने मधुर संकीर्तन और गूढ़ प्रवचनों से भक्तों को निहाल कर दिया।संकीर्तन की शुरुआत श्री सिद्धपीठ परिकर के सोहन लाल सोनू, सीताराम अरोड़ा और आर्यन प्रभाकर द्वारा की गई।इसके पश्चात श्री दिव्य दास जी ने “जय जय जगन्नाथ भगवान निताई गौर राधे श्याम”, “भैया एक बार हरि बोलो”, “ऊँचे बरसाने वाली मोहे पर कृपा करो”, “राधा नाम परम सुखदाई तू गा ले राधा नाम”, “जगन्नाथ चक्का नैण, नीलाचल वारे…” जैसे मधुर भजनों से वातावरण को हरि-रस से परिपूर्ण कर दिया।प्रवचन में दैवज्ञ महर्षि आचार्य निशांत जी ने कहा कि—“अच्छा जीवन, धन-धान्य, परिवार और सुख-संपत्ति मिल जाना सामान्य बात है। परंतु उत्तम सतगुरु का मिलना अत्यंत दुर्लभ है।

आप सब सौभाग्यशाली हैं कि आपको केवल गुरु नहीं, बल्कि साक्षात् शिवस्वरूप महाराज जी प्राप्त हुए हैं।” उन्होंने “श्यामा जू तेरे चरणन की बलहारी…” जैसे भजनों का गायन कर भक्तों को भावविभोर किया। इसी दौरान श्री महाराज जी ने प्रेमपूर्वक उपदेश देते हुए कहा—“हम सबकी नाव भगवान के हाथ में है। वे जहाँ चाहें, सहज ही हमें वहाँ पहुँचा सकते हैं। हमें अपना विश्वास दृढ़ रखना चाहिए, क्योंकि ईश्वर कभी किसी की नाव डूबने नहीं देते। जो भी हो रहा है, वह परमात्मा की प्रेरणा, कृपा और लीला है। हम यहाँ बैठे हुए केवल माध्यम हैं, करने वाला तो वही एक परमात्मा है। हमें बस निष्ठा और समर्पण बनाए रखना है।”पंडित राज कुमार शर्मा ने आज के मुख्य अतिथियों—दैवज्ञ महर्षि आचार्य निशांत जी तथा श्री दिव्य दास जी—का हृदय से धन्यवाद किया।आज श्रीधाम वृंदावन से पधारे श्री हनुमान दास बाबा जी हरिनाम का नाम-जप कराएंगे।

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